चाईबासा में 31 अक्टूबर से दो दिवसीय बंग साहित्य सम्मेलन, तीन राज्यों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

पिल्लई हॉल में होने वाले क्षेत्रीय अधिवेशन में बांग्ला शिक्षा, स्थानीय भाषाओं से साहित्यिक संवाद, कविता पाठ, समिति चुनाव और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों पर केंद्रित कार्यक्रम होंगे।

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चाईबासा के पिल्लई हॉल में 31 अक्टूबर और 1 नवंबर 2026 को निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन की बिहार, झारखंड एवं ओडिशा क्षेत्रीय समिति का 11वां द्विवार्षिक अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। दो दिवसीय आयोजन की मेजबानी सम्मेलन की चाईबासा शाखा करेगी। इसमें तीनों राज्यों की विभिन्न शाखाओं से प्रतिनिधि, साहित्यकार, शिक्षाविद्, कवि और कलाकार भाग लेंगे।

बंगाली सेवा समिति के सदस्य और अधिवक्ता अमिताभ सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अधिवेशन का उद्घाटन 31 अक्टूबर को अपराह्न तीन बजे होगा। प्रस्तावित उद्घाटन कार्यक्रम में मंत्री दीपक बिरूवा, राज्यसभा सांसद महुआ मांझी, कोल्हान विश्वविद्यालय के डीन डॉ. तपन खांड़ा और नगर परिषद अध्यक्ष नितिन प्रकाश सहित अन्य अतिथियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इसी अवसर पर सम्मेलन की पत्रिका ‘बनवाणी’ का विमोचन भी निर्धारित है।

आयोजन के दूसरे दिन साहित्य और शिक्षा से जुड़े अलग-अलग विषयों पर परिचर्चाएं होंगी। एक सत्र में झारखंड में बांग्ला शिक्षा की मौजूदा स्थिति और उसके समाधान पर विचार रखा जाएगा। इस चर्चा के माध्यम से शिक्षा से संबंधित मुद्दों को क्षेत्रीय प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों के बीच रखा जाएगा।

एक अन्य सत्र बांग्ला साहित्य तथा झारखंड की हो, कुड़माली और संथाली भाषाओं के आपसी मेल-जोल पर केंद्रित रहेगा। आयोजकों के अनुसार, संबंधित भाषाओं के विद्वान और शिक्षाविद् इसमें हिस्सा लेंगे। यह सत्र अलग-अलग भाषाई साहित्य के बीच संवाद को प्रमुखता देगा।

अधिवेशन में शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की 150वीं जयंती तथा महाश्वेता देवी और सुकांत भट्टाचार्य की 100वीं जयंती के अवसर पर उनके साहित्यिक योगदान को भी याद किया जाएगा। इसके साथ कविता पाठ, क्षेत्रीय समिति का चुनाव, नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के नामों की घोषणा और पुरस्कार वितरण भी कार्यक्रम में शामिल हैं।

दोनों दिन शाम को विभिन्न शाखाओं के कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। चाईबासा के अलावा चक्रधरपुर, कोडरमा, रांची, राउरकेला और जमशेदपुर सहित अन्य शाखाओं के प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। आयोजन में साहित्यिक चर्चा, संगठनात्मक गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को एक साझा मंच पर रखा जाएगा।