दिल्ली के चिन्मय अमृत महोत्सव में बोकारो के विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किया संथाली नृत्य

चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने पर भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में बोकारो के विद्यार्थियों ने झारखंड की लोक संस्कृति को मंच पर उतारा।

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चिन्मय अमृत महोत्सव में संथाली नृत्य प्रस्तुत करतीं बोकारो की छात्राएं

बोकारो के चिन्मय विद्यालय के विद्यार्थियों ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ में संथाली नृत्य प्रस्तुत किया। 23 से 25 अक्टूबर तक चले तीन दिवसीय विश्व सम्मेलन में उनकी प्रस्तुति ने झारखंड की लोक कला और सांस्कृतिक परंपरा को देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों के सामने रखा।

यह आयोजन चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया था। सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। उनके संबोधन के बाद हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम में बोकारो के विद्यार्थियों को अपनी प्रस्तुति देने का अवसर मिला। आयोजकों के अनुसार, प्रतिनिधियों ने संथाली नृत्य की सराहना की।

विद्यालय की भागीदारी केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही। चिन्मय विद्यालय बोकारो और स्थानीय चिन्मय परिवार से जुड़े 100 से अधिक चयनित स्वयंसेवकों ने सम्मेलन की व्यवस्थाओं में योगदान दिया। उन्होंने आयोजन समिति, खान-पान व्यवस्था और प्रदर्शनी विभाग से संबंधित जिम्मेदारियां संभालीं।

महोत्सव में आध्यात्मिक चेतना, वेदांत दर्शन और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर केंद्रित कार्यक्रम भी हुए। स्वामी तेजोमयानंद और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने युवाओं को वेदांत तथा श्रीमद्भगवद्गीता के विचारों से जोड़ने का प्रयास किया। सम्मेलन में स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता पर भी चर्चा हुई।

आयोजन के अंतिम दिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अद्वैत दर्शन और समकालीन वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में अपने विचार रखे। इस तरह सम्मेलन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ आध्यात्मिक और दार्शनिक विषयों पर विचार-विमर्श को भी स्थान मिला।

बोकारो दल की प्रस्तुति और स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका पर विद्यालय परिवार ने खुशी जताई है। इस सहभागिता को झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक मंच पर प्रदर्शित करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। मिशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी बोकारो से पहुंचे दल के योगदान की प्रशंसा की।