रांची के विधायक क्लब में मंगलवार को झारखंड आंदोलनकारी फादर एंथोनी मुर्मू की 96वीं जयंती मनाई गई। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने अलग राज्य के आंदोलन और संताल समाज के अधिकारों से जुड़े उनके योगदान को याद किया।
मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि फादर एंथोनी मुर्मू ने अलग झारखंड की मांग के साथ महाजनी प्रथा, अंधविश्वास और नशे के खिलाफ भी संघर्ष किया था। उन्होंने मुर्मू के त्याग और आंदोलन में उनकी भूमिका को स्मरण करते हुए कहा कि उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
कार्यक्रम में बताया गया कि सक्रिय राजनीति में आने से पहले एंथोनी मुर्मू जेसुइट पादरी थे और इसी कारण उन्हें फादर एंथोनी के नाम से जाना गया। बाद में उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना। वर्ष 1977 के आम चुनाव में वह जनता पार्टी के टिकट पर बिहार की राजमहल लोकसभा सीट से निर्वाचित हुए और छठी लोकसभा के सदस्य बने।
वक्ताओं के अनुसार, सांसद रहते हुए उन्होंने संसद में अलग झारखंड राज्य, संतालियों के अधिकारों की रक्षा और शोषण से मुक्ति से जुड़े मुद्दे उठाए। कार्यक्रम में 19 अप्रैल 1985 को हुई उनकी हत्या का भी उल्लेख किया गया। हत्या से जुड़ी जिम्मेदारी के बारे में वक्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
इस अवसर पर झारखंड आंदोलनकारी महासभा के अध्यक्ष राजू महतो ने राज्य सरकार से वास्तविक आंदोलनकारियों को सम्मान, पेंशन और अधिकार देने की मांग की। उन्होंने सरकार से 15 नवंबर से पहले आंदोलनकारियों के विषय पर वार्ता कर नियमावली तैयार करने का आग्रह किया।
महासभा ने कहा कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में राज्य स्थापना दिवस पर सामूहिक उपवास किया जाएगा। कार्यक्रम में वरुण कश्यप, विनीता खलखो, एरेन कच्छप, सीता उरांव, रोजन उरांव, रुदन उरांव, गुंदे प्रधान, बिरसा मुंडा और सरजन हांसदा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।