धनबाद जिले के कतरास स्थित छाताबाद में भू-धंसान की समस्या और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर बाघमारा सभागार में प्रशासन, बीसीसीएल और ग्रामीणों की बैठक हुई। अंचल अधिकारी की अगुवाई में हुई चर्चा में असुरक्षित क्षेत्र के आकलन, लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने और स्थायी पुनर्वास के विकल्पों पर बात की गई। हालांकि बैठक के बाद तत्काल समाधान या स्थायी पुनर्वास पर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया।
बैठक के दौरान ग्रामीणों और बीसीसीएल अधिकारियों के बीच कई मुद्दों पर नोकझोंक भी हुई। प्रभावित लोगों ने भू-धंसान वाले इलाके की जांच कराने और खुदाई से बने प्रभावित हिस्सों को मिट्टी से भरने की मांग रखी। उनका कहना था कि यदि वर्तमान स्थान रहने योग्य नहीं है तो उन्हें आसपास ही सुरक्षित जगह पर बसाया जाए, ताकि रोजगार और दैनिक जीवन अधिक प्रभावित न हो।
बीसीसीएल एरिया-3 के महाप्रबंधक के मुताबिक, जमीन के नीचे की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन आईआईटी आईएसएम धनबाद करेगा। इसकी रिपोर्ट लगभग 15 से 20 दिनों में मिलने की उम्मीद जताई गई है। अधिकारियों ने कहा कि रिपोर्ट में सामने आने वाली स्थिति के आधार पर सुरक्षा और आगे की कार्रवाई से जुड़े निर्णय लिए जाएंगे।
फिलहाल प्रभावित परिवारों से खतरे वाले स्थान को छोड़कर सुरक्षित जगह जाने की अपील की गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अटल क्लिनिक में अस्थायी राहत व्यवस्था की गई है, जहां रहने और भोजन की सुविधा दी जा रही है। कुछ प्रभावित परिवार अभी बीसीसीएल की ओर से बनाए गए राहत शिविर में रह रहे हैं।
बीसीसीएल ने प्रभावित इलाके में एक टीम भेजकर सर्वे कराने की बात भी कही है। सर्वे के जरिए जमीन की मौजूदा स्थिति और संभावित खतरे का आकलन किया जाएगा। प्रबंधन ने बैठक में इलाके में हो रहे अवैध खनन को भू-धंसान की समस्या का एक प्रमुख कारण बताया और इसे रोकने के लिए कार्रवाई जारी रहने की जानकारी दी।
स्थायी पुनर्वास के सवाल पर बेलगड़िया में जेआरडीए के माध्यम से लोगों को बसाने की योजना का उल्लेख किया गया। वहीं, बाघमारा के अंचल अधिकारी ने प्रभावित परिवारों को प्रशासनिक सहायता देने और सुरक्षा को प्राथमिकता देने का भरोसा दिलाया। अब ग्रामीणों को वैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट तथा प्रशासन और बीसीसीएल की अगली कार्रवाई का इंतजार है।