झारखंड के 38 विभागों में नए आंतरिक वित्तीय सलाहकार, खर्च और प्रस्तावों की करेंगे समीक्षा

राज्य सरकार ने 38 विभागों के लिए आंतरिक वित्तीय सलाहकारों की नई सूची जारी की है। ये अधिकारी बजट, खरीद और योजनाओं से जुड़े वित्तीय प्रस्तावों की जांच करेंगे।

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झारखंड के 38 विभागों में आंतरिक वित्तीय सलाहकारों की नई सूची जारी

रांची में झारखंड सरकार ने 38 विभागों के लिए आंतरिक वित्तीय सलाहकारों (आईएफए) की नई सूची जारी की है। इस व्यवस्था के तहत विभागों के वित्तीय प्रस्तावों, उपलब्ध बजट और सरकारी खर्च से जुड़े मामलों की समीक्षा की जाएगी। नई सूची में कई अधिकारियों को अलग जिम्मेदारी मिली है, जबकि कुछ अधिकारी अपनी पूर्व जिम्मेदारी संभालते रहेंगे।

आंतरिक वित्तीय सलाहकार विभाग में आने वाले प्रस्तावों को वित्तीय नियमों की कसौटी पर परखते हैं। किसी योजना, महत्वपूर्ण खरीद या दूसरे वित्तीय प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले वे देखते हैं कि संबंधित मद में बजट उपलब्ध है या नहीं और प्रस्ताव निर्धारित नियमों के अनुरूप है या नहीं। खर्च के औचित्य की जांच भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल है।

जारी सूची के अनुसार, कमर्शियल टैक्स विभाग में संयुक्त सचिव विनय कुमार को आईएफए बनाया गया है। ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी अनंत कुमार और पथ निर्माण विभाग की जिम्मेदारी प्रिसिला मुर्मू को दी गई है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के लिए अरुण कुमार सिंह को यह दायित्व मिला है।

गृह, जेल एवं आपदा प्रबंधन विभाग में अजय कुमार सिंह को आंतरिक वित्तीय सलाहकार बनाया गया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग में आसिफ हसन और कैबिनेट सचिवालय में नीलम लता को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन विभागों में प्रस्तावित खर्च और वित्तीय प्रक्रियाओं की समीक्षा संबंधित आईएफए करेंगे।

कृषि विभाग के पशुपालन प्रभाग में नयनतारा केरकेट्टा, भवन निर्माण विभाग में विधान चंद्र चौधरी और पर्यटन प्रभाग में अरुण कुमार को जिम्मेदारी मिली है। जल संसाधन विभाग में राजेश रंजन तथा श्रम विभाग में रेजियुस बाड़ा को आईएफए बनाया गया है।

नई सूची के जरिए सरकार ने विभागवार वित्तीय निगरानी की जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। बड़े बजट वाले विभागों में योजनाओं और खरीद से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा में इन अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी राशि के इस्तेमाल को वित्तीय नियमों के अनुरूप रखना और विभागीय खर्च में अनुशासन सुनिश्चित करना है।