झारखंड में जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों की पहचान और उपचार के लिए दो विशेष जांच शिविर आयोजित किए जाएंगे। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 29 अक्टूबर को लातेहार और 30 अक्टूबर को रांची में लगने वाले इन शिविरों में शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चों की मुफ्त जांच होगी। उपचार की जरूरत मिलने पर उन्हें ऑपरेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
लातेहार का शिविर 29 अक्टूबर को पुलिस लाइन के पास स्थित टाउन हॉल में लगेगा। अगले दिन रांची के रिम्स ऑडिटोरियम में जांच की जाएगी। दोनों स्थानों पर शिविर का समय सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक निर्धारित है। बच्चों की जांच के लिए अमृता अस्पताल की विशेषज्ञ टीम झारखंड पहुंच चुकी है।
शिविर में हृदय में छेद सहित जन्मजात हृदय संबंधी समस्याओं की जांच की जाएगी। इनमें एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट, वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट और पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस जैसी स्थितियां शामिल हैं। अभियान का उद्देश्य आर्थिक कठिनाइयों के कारण उपचार से वंचित बच्चों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध कराना है।
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल में केवल जांच और ऑपरेशन ही नहीं, बल्कि दवा तथा अस्पताल में रहने और भोजन की व्यवस्था भी शामिल है। बच्चे के साथ जाने वाले अभिभावक की यात्रा का खर्च उठाने की बात भी कही गई है। ऑपरेशन के बाद घर वापसी तक देखभाल और आगे की चिकित्सीय निगरानी की व्यवस्था रहेगी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य में इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक 351 बच्चों की सफल सर्जरी हो चुकी है। हृदय में छेद वाले चिह्नित बच्चों के ऑपरेशन कोच्चि के अमृता अस्पताल और हैदराबाद के सत्य साईं अस्पताल में किए जा रहे हैं। इससे पहले रांची सदर अस्पताल में दो दिनों के शिविर के दौरान 305 बच्चों की स्क्रीनिंग हुई थी, जिनमें 101 को सर्जरी के लिए चिह्नित किया गया था।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों से जन्मजात हृदय रोग के लक्षण वाले बच्चों को शिविर तक पहुंचाने में सहयोग करने की अपील की है। विभाग के मुताबिक समय पर जांच होने से प्रभावित बच्चों की पहचान और आवश्यक उपचार की प्रक्रिया जल्द शुरू करने में मदद मिलेगी। शिविर संबंधी जानकारी सिविल सर्जन कार्यालय, नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या स्वास्थ्य हेल्पलाइन 104 से ली जा सकती है।