जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में लिफ्टों की खराबी ने मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ा दी है। अस्पताल में लगी कुल 16 लिफ्टों में से 14 अभी खराब हैं और केवल दो से काम चलाया जा रहा है। इसका असर रोजाना एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक होने वाली मरीजों की आवाजाही पर पड़ रहा है।
अस्पताल के कई महत्वपूर्ण विभाग ऊपरी मंजिलों पर संचालित होते हैं। ऐसे में इमरजेंसी, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर तक जाने वाले गंभीर मरीजों को पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। समय पर संबंधित विभाग तक ले जाने में भी बाधा आ रही है। बुजुर्गों, कमजोर मरीजों और चलने-फिरने में असमर्थ लोगों के लिए स्थिति अधिक कठिन बनी हुई है।
एमजीएम को कोल्हान का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल माना जाता है। यहां मरीजों के साथ कर्मचारियों को भी नियमित रूप से अलग-अलग मंजिलों के बीच आना-जाना पड़ता है। लिफ्ट सेवा सीमित होने के कारण दवाओं और जरूरी सामान को ऊपर-नीचे पहुंचाने जैसे काम भी प्रभावित होते हैं।
अस्पताल में यह समस्या पहली बार सामने नहीं आई है। जून 2026 में भी 16 में से 12 लिफ्ट खराब होने की जानकारी सामने आई थी। उस समय मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ा था। कर्मचारियों को दवाओं तथा आवश्यक सामान की पेटियां भी सीढ़ियों से ले जानी पड़ी थीं।
इससे पहले अक्टूबर 2025 में एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर की सर्विस बिल्डिंग की एक लिफ्ट अचानक बंद हो गई थी। उसमें एक कर्मचारी करीब 50 मिनट तक फंसा रहा था और काफी प्रयास के बाद उसे बाहर निकाला गया था। उस घटना के बाद कर्मचारियों ने लिफ्ट के अचानक रुकने और बिजली जाने पर उसके बंद हो जाने को लेकर चिंता जताई थी।
अस्पताल प्रबंधन अब खराब लिफ्टों को ठीक कराने की तैयारी कर रहा है। अधीक्षक डॉ. बलराम झा के अनुसार, मरम्मत के लिए संबंधित कंपनी के साथ एमओयू करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने सभी लिफ्टों को जल्द दुरुस्त कराने की बात कही है। फिलहाल केवल दो लिफ्ट चालू रहने से मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।