जमशेदपुर के सोनारी में गोलू पूजा, सात सीढ़ियों पर सजी सांस्कृतिक परंपराओं की झांकी

सोनारी के एक परिवार ने दुर्गा पूजा के साथ दक्षिण भारत की पारंपरिक गोलू पूजा आयोजित की है। सात सीढ़ियों पर सजी गुड़ियां देवी-देवताओं, पौराणिक प्रसंगों और लोकजीवन की झलक दिखा रही हैं।

2 मिनट पढ़ें 5 बार पढ़ी गई
जमशेदपुर के सोनारी में सात सीढ़ियों पर सजाई गई गोलू पूजा की गुड़ियां

जमशेदपुर के सोनारी स्थित एक अपार्टमेंट में दुर्गा पूजा के साथ दक्षिण भारत की पारंपरिक गोलू पूजा का रंग भी दिखाई दे रहा है। यहां रहने वाले दिलीप और सुधा ने अपने घर में सात सीढ़ियों वाला मंच तैयार कर उस पर अलग-अलग प्रकार की गुड़ियां सजाई हैं। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का संगम प्रस्तुत कर रहा है।

सजावट में देवी-देवताओं से जुड़ी गुड़ियों को प्रमुख स्थान दिया गया है। अलग-अलग सीढ़ियों पर रखी गई प्रत्येक आकृति किसी धार्मिक मान्यता, पौराणिक प्रसंग या सांस्कृतिक परंपरा की ओर संकेत करती है। सीढ़ीनुमा मंच पर गुड़ियों को क्रमबद्ध तरीके से सजाने के कारण पूरा दृश्य एक छोटी सांस्कृतिक प्रदर्शनी जैसा दिखाई देता है।

गोलू पूजा दक्षिण भारत में नवरात्र के दौरान निभाई जाने वाली परंपरा है। इसमें घरों के भीतर सीढ़ीनुमा मंच बनाकर मिट्टी, लकड़ी और दूसरी सामग्रियों से तैयार गुड़ियां रखी जाती हैं। तमिलनाडु में इसे बोम्मई गोलू, कर्नाटक में बोम्बे हब्बा तथा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बोम्माला कोलुवु के नाम से जाना जाता है।

इस परंपरा में सामान्यतः तीन, पांच, सात, नौ या ग्यारह जैसी विषम संख्या में सीढ़ियां सजाई जाती हैं। सीढ़ियों की संख्या परिवार की परंपरा और घर में उपलब्ध स्थान के आधार पर अलग हो सकती है। सोनारी में तैयार मंच के लिए सात सीढ़ियां चुनी गई हैं, जिन पर धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों वाली गुड़ियों को स्थान मिला है।

गोलू की सजावट केवल देवी दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती और भगवान गणेश की आकृतियों तक सीमित नहीं रहती। इसमें पौराणिक कथाओं के साथ विवाह समारोह, ग्रामीण जीवन और अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक दृश्यों को दर्शाने वाली गुड़ियां भी रखी जाती हैं। इस तरह पूजा के माध्यम से लोकजीवन और धार्मिक परंपरा के कई रूप एक साथ सामने आते हैं।

सोनारी का यह आयोजन गुड़ियों के माध्यम से बच्चों और नई पीढ़ी को धार्मिक कथाओं तथा सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का अवसर भी देता है। जमशेदपुर में दुर्गा पूजा के परिचित स्वरूप के बीच दक्षिण भारतीय परंपरा की यह घरेलू सजावट त्योहार मनाने की क्षेत्रीय विविधता को सामने ला रही है।