जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के सिदगोड़ा स्थित नए परिसर के छात्रावास की स्थिति को देखते हुए करीब 70 छात्राओं को बिष्टुपुर के पुराने कैंपस में स्थानांतरित किया गया है। परिसर के महिला छात्रावास और अकादमिक ब्लॉक की दीवारों में लंबी तथा गहरी दरारें दिखाई दी हैं। कई स्थानों पर दीवारों से प्लास्टर भी टूटकर गिर रहा है।
करीब 89 करोड़ रुपये की लागत से नौ मंजिला परिसर का निर्माण कराया गया था। यहां अक्टूबर 2023 में दुर्गापूजा से पहले शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियां शुरू हुई थीं। संचालन शुरू होने के लगभग दो वर्ष के भीतर भवन की हालत को लेकर चिंता सामने आई है। छात्रावास के कमरों के दरवाजे भी ठीक तरीके से बंद नहीं होने की बात छात्राओं ने कही है।
विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ सलोमी कुजूर के अनुसार, छात्रावास की दीवारें टूटने और भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए छात्राओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। इसी के तहत छात्रावास खाली कराकर वहां रहने वाली छात्राओं को बिष्टुपुर परिसर के हॉस्टल में भेजा गया।
भवन की मरम्मत का मामला कुलपति के संज्ञान में लाने के बाद उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को पत्र भेजा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जीर्णोद्धार का काम जल्द शुरू कराया जाएगा। मरम्मत शुरू होने से पहले ही एहतियाती कदम के रूप में छात्रावास खाली कराया गया है।
कुलपति डॉ इला कुमार ने बताया कि सिदगोड़ा परिसर में अभी कई अन्य इमारतों का निर्माण भी होना है। परिसर के दूसरे चरण का काम शुरू करने की तैयारी है और इसके साथ छात्रावास का जीर्णोद्धार भी कराया जाएगा। फिलहाल स्थानांतरण की कार्रवाई छात्राओं को क्षतिग्रस्त हिस्सों से दूर रखने के उद्देश्य से की गई है।
सिदगोड़ा का नया परिसर 17 एकड़ जमीन पर बनाया गया है और यहां लगभग तीन हजार छात्राएं अध्ययनरत हैं। परिसर में स्नातकोत्तर एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की कक्षाओं के साथ परीक्षा विभाग से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित होती हैं। विश्वविद्यालय की शुरुआत वर्ष 1953 में बिष्टुपुर स्थित जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज के रूप में हुई थी, जिसे बाद में विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।