जरजट्टा के पारंपरिक मांदर को मिला जीआई पंजीकरण, गुमला के कारीगर सम्मानित

गुमला के रायडीह प्रखंड स्थित जरजट्टा गांव में चार पीढ़ियों से बन रहे पारंपरिक मांदर को जीआई पंजीकरण मिला है। जिला प्रशासन ने इससे जुड़े कारीगरों को सम्मानित किया।

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गुमला के जरजट्टा गांव में पारंपरिक मांदर बनाने वाले सम्मानित कारीगर

गुमला जिले के रायडीह प्रखंड स्थित जरजट्टा गांव के पारंपरिक मांदर को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई पंजीकरण मिला है। 28 सितंबर 2026 को मिली इस पहचान के बाद बुधवार को आयोजित समारोह में मांदर बनाने वाले कारीगरों और मांदर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के पदाधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।

जरजट्टा में मांदर निर्माण की कला चार पीढ़ियों से चली आ रही है। गांव के करीब 25 कारीगर परिवार इस पारंपरिक काम से जुड़े हैं। झारखंड के सरहुल, करमा और सोहराय जैसे पर्वों के साथ लोकनृत्य और पारंपरिक संगीत में मांदर की प्रमुख भूमिका रही है। जीआई पंजीकरण से इस वाद्ययंत्र के साथ इसके निर्माण क्षेत्र और कारीगर समुदाय की विशिष्ट पहचान भी दर्ज हुई है।

सम्मान समारोह में गुमला के उपायुक्त दिलेश्वर महतो और उप विकास आयुक्त अनिमेश रंजन ने कारीगरों तथा प्रोड्यूसर कंपनी के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। उपायुक्त ने इस उपलब्धि को गुमला के साथ पूरे झारखंड के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इससे जरजट्टा गांव और यहां के शिल्पकारों की पहचान देश-दुनिया में मजबूत होने की उम्मीद है।

जिला प्रशासन ने मांदर के उत्पादन, ब्रांडिंग, विपणन और बाजार उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में काम करने की बात कही है। प्रशासन का उद्देश्य इन प्रयासों का लाभ सीधे कारीगरों की आय और आजीविका तक पहुंचाना है। उप विकास आयुक्त ने भी आने वाले समय में मांग बढ़ने और नए कारीगरों के इस पारंपरिक व्यवसाय से जुड़ने की संभावना जताई।

उद्यमी समन्वयक सूरज कुमार के अनुसार, मांदर को जीआई पहचान दिलाने की प्रक्रिया वर्ष 2020 के आसपास शुरू हुई थी। वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की ओर से आवेदन किया गया। इसके बाद अलग-अलग चरणों में दस्तावेजी और तकनीकी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, जिसके परिणामस्वरूप 28 सितंबर को पंजीकरण मिला।

जीआई पहचान से जरजट्टा के मांदर को संरक्षण, विशिष्ट ब्रांड पहचान और बाजार विस्तार का आधार मिलने की उम्मीद है। इससे पारंपरिक कौशल को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ने की संभावना भी बनेगी। हालांकि इसका वास्तविक आर्थिक लाभ उत्पादन, विपणन और बाजार तक पहुंच के लिए उठाए जाने वाले आगे के कदमों पर निर्भर करेगा।