रांची में इस बार दुर्गा पूजा के पंडाल धार्मिक आस्था के साथ कला, स्थापत्य और कल्पनाशील सजावट का मेल प्रस्तुत करेंगे। राजधानी की अलग-अलग पूजा समितियां प्रसिद्ध मंदिरों, पौराणिक प्रसंगों, आदिवासी कला और आधुनिक मनोरंजन से प्रेरित प्रारूप तैयार कर रही हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, कई पंडालों की ऊंचाई, सजावट और विषय-वस्तु में अलग प्रयोग किए जा रहे हैं।
बकरी बाजार में भारतीय युवक संघ तमिलनाडु के बृहदेश्वर मंदिर की शैली पर पंडाल बना रहा है। इसके लिए एक करोड़ रुपये से अधिक का बजट बताया गया है। जिला स्कूल मैदान में वाराणसी के स्वर्वेद महामंदिर से प्रेरित पंडाल तैयार किया जा रहा है, जिसकी लागत करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताई गई है। दोनों स्थानों पर मंदिरों की स्थापत्य विशेषताओं को बड़े ढांचे और सजावटी काम के माध्यम से दिखाने की तैयारी है।
हरमू पंच मंदिर में पौराणिक राजस्थानी शैली के काल्पनिक मंदिर का लगभग 75 फीट ऊंचा प्रारूप बनाया जा रहा है। सिंहमोड़, हटिया में इंडोनेशियाई शैली के श्रीराम मंदिर पर आधारित करीब 60 फीट ऊंचा पंडाल तैयार हो रहा है। अल्बर्ट एक्का चौक पर चंद्रशेखर आजाद पूजा समिति ने ‘द्वारका नगरी’ को अपनी थीम बनाया है।
अरगोड़ा में बच्चों और युवाओं को ध्यान में रखते हुए डिज्नीलैंड थीम का करीब 50 फीट ऊंचा पंडाल बनाया जा रहा है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 30 लाख रुपये बताई गई है। महावीर चौक का 51 फीट ऊंचा पंडाल झारखंड की आदिवासी कला पर केंद्रित रहेगा, जहां सजावट में राज्य की सांस्कृतिक पहचान को स्थान देने की तैयारी है।
हिनू की शुक्ला कॉलोनी में सनातन संघ रोजमर्रा की लोकप्रिय खाद्य संस्कृति को पंडाल की थीम से जोड़ रहा है। यहां लगभग 55 फीट ऊंचा ढांचा गोलगप्पे की टोकरी और चना-चूर कॉर्नर के स्वरूप में बनाया जा रहा है। रातू रोड स्थित आरआर स्पोर्टिंग क्लब ने ‘टेंपल ऑफ टुगेदर’ विषय चुना है, जिसमें कलाकृतियों और विद्युत सज्जा से एकता और भाईचारे का संदेश प्रस्तुत करने की योजना है।
रांची रेलवे स्टेशन के पंडाल में भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़े प्रसंग को आधार बनाया गया है। कोकर बाजार में कैलाश शिला अथवा राजस्थानी महल शैली से प्रेरित संरचना तैयार की जा रही है। राजधानी में प्रस्तावित इन विविध विषयों से पूजा पंडालों में धार्मिक, सांस्कृतिक और आधुनिक कल्पनाओं के कई रूप एक साथ दिखाई देंगे।