जामताड़ा के तिलबानी गांव में केंद्र सरकार के ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। आत्मा की ओर से हुए इस कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने, वैज्ञानिक खेती अपनाने और कृषि को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के उपाय बताए गए। कार्यक्रम में लगभग 72 किसानों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान दलहन और तिलहन की उन्नत खेती की तकनीकों के साथ गुणवत्तापूर्ण बीज के उपयोग पर जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि फसल उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए खेत की जरूरत के अनुसार कृषि पद्धतियों का चयन और मिट्टी की स्थिति पर नियमित ध्यान देना आवश्यक है।
कार्यक्रम में मृदा स्वास्थ्य की जांच और मिट्टी संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया। झारखंड में अम्लीय मिट्टी की समस्या को देखते हुए किसानों को मृदा स्वास्थ्य सुधारने के तरीकों से अवगत कराया गया। अभियान में खेत की उत्पादक क्षमता बनाए रखने को टिकाऊ कृषि का अहम हिस्सा बताया गया।
किसानों को संतुलित मात्रा में उर्वरकों के इस्तेमाल तथा जैविक खाद के लाभों की भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग से बचने और उपलब्ध संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करने के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
झारखंड में यह अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक चलाया जा रहा है। इसके तहत राज्य के सभी जिलों में किसानों को मिट्टी की उर्वरा शक्ति, मृदा जांच, बेहतर बीज और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के संबंध में जागरूक करने का कार्यक्रम है। अभियान की परिकल्पना केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की है।
तिलबानी के कार्यक्रम में पंचायत की मुखिया, जनप्रतिनिधि, कृषक मित्र, प्रगतिशील किसान तथा महिला और पुरुष किसान उपस्थित रहे। अभियान का घोषित लक्ष्य किसानों को वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती से जोड़कर कृषि उत्पादन की गुणवत्ता सुधारना है। इसके साथ ही बेहतर उत्पादन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने को भी अभियान के उद्देश्यों में शामिल किया गया है।