जामताड़ा में पीपीपी मॉडल पर बनेगा 100 एमबीबीएस सीट और 420 बेड वाला मेडिकल कॉलेज

जामताड़ा सदर अस्पताल को शामिल करते हुए पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की योजना है। परियोजना के लिए एमओयू किया गया है और तीन संस्थानों को लेटर ऑफ इंटेंट जारी हुआ है।

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जामताड़ा मेडिकल कॉलेज परियोजना के एमओयू के अवसर पर उपस्थित स्वास्थ्य मंत्री और अधिकारी

जामताड़ा में सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर नया मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने कदम बढ़ाया है। प्रस्तावित कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटें होंगी। योजना में जामताड़ा सदर अस्पताल को शामिल करते हुए अस्पताल की मौजूदा 100 बेड क्षमता को बढ़ाकर 420 बेड करने का प्रस्ताव रखा गया है।

परियोजना को लेकर गुरुवार को एमओयू किया गया। इस मौके पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए मैसर्स मणिमहेश हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड, आई केयर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च तथा डॉ. विधान चंद्र राय हॉस्पिटल को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जल्द प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास करेंगे। हालांकि शिलान्यास की निश्चित तारीख की जानकारी नहीं दी गई है। इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई है।

मेडिकल कॉलेज बनने पर जिले में चिकित्सा शिक्षा की सुविधा का विस्तार होने की उम्मीद है। 100 एमबीबीएस सीटों की व्यवस्था से विद्यार्थियों को चिकित्सा की पढ़ाई का नया विकल्प मिल सकता है। वहीं अस्पताल की क्षमता 420 बेड तक बढ़ने पर स्थानीय मरीजों के लिए उपचार संबंधी संसाधनों में भी वृद्धि की संभावना है।

राज्य सरकार की योजना के तहत जामताड़ा के अलावा रांची, खूंटी, गिरिडीह और धनबाद में भी पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने हैं। जामताड़ा की परियोजना इसी व्यापक योजना का हिस्सा बताई गई है। फिलहाल उपलब्ध विवरण में निर्माण शुरू होने, पूरा होने या प्रवेश आरंभ होने की समय-सीमा नहीं बताई गई है।

स्वास्थ्य मंत्री ने परियोजना से विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई है। परियोजना के वास्तविक लाभ उसके निर्माण, अस्पताल विस्तार और शैक्षणिक संचालन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएंगे। एमओयू और लेटर ऑफ इंटेंट को फिलहाल मेडिकल कॉलेज की स्थापना की प्रारंभिक प्रशासनिक प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।