रांची में जेएसएससी की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा-2023 से जुड़े कथित पेपर लीक मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष पूरे नेटवर्क के काम करने के तरीके का विवरण रखा है। संजय कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा गया कि अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पटना में एक स्थान पर जुटाया गया और प्रश्नों के उत्तर याद कराए गए। ये बातें फिलहाल अभियोजन के आरोप हैं।
15 अक्टूबर को एजेसी-1 योगेश कुमार की अदालत से पारित आदेश में दर्ज अभियोजन के विवरण के मुताबिक, 20 सितंबर 2024 को कई अभ्यर्थियों को गांधी मैदान और बुद्ध स्मृति पार्क के आसपास बुलाया गया था। इसके बाद उन्हें कथित रूप से एक मकान में ले जाया गया, जहां प्रश्नपत्र के तीन सेट और उनके उत्तर उपलब्ध कराए गए।
अभियोजन का दावा है कि अभ्यर्थियों को करीब तीन घंटे तक प्रश्न और उत्तर याद कराए गए। इसके बाद प्रश्नपत्र तथा उत्तर वाली सामग्री जलाकर नष्ट कर दी गई और अभ्यर्थियों को अलग-अलग रास्तों से वहां से भेजा गया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस कथित व्यवस्था में कई लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं।
सीआईडी जांच के हवाले से अदालत में यह भी कहा गया कि कुछ अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र और चेक जमा कराए गए थे। अभियोजन ने इन्हें कथित तौर पर सुरक्षा के रूप में रखे जाने की बात कही। आरोप है कि चयन का भरोसा देकर अभ्यर्थियों को इस व्यवस्था से जोड़ा गया था।
जांच में संजय कुमार की भूमिका कथित बिचौलिए के रूप में बताई गई है। अभियोजन के अनुसार, उसने अपने परिचितों के माध्यम से परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को जुटाया और पटना पहुंचाने तथा दूसरे लोगों से समन्वय करने में भूमिका निभाई। भिखना पहाड़ी स्थित एक अकादमी के संचालक से संपर्क का आरोप भी अदालत के आदेश में दर्ज विवरण का हिस्सा है।
मामले में वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है। अभियोजन ने केस डायरी के आधार पर दिसंबर 2024 में संजय कुमार के बैंक खाते में करीब तीन लाख रुपये आने का उल्लेख किया है। अदालत के समक्ष रखे गए ये आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं; उपलब्ध विवरण में मामले के अंतिम निष्कर्ष या दोषसिद्धि की जानकारी नहीं दी गई है।