जेएसएससी सीजीएल से नियुक्त 284 अभ्यर्थियों को राहत, हाईकोर्ट ने नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक

झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के जरिए नियुक्त 284 अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करने वाले राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगाते हुए जवाब मांगा है।

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रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट में जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति मामले की सुनवाई

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा के माध्यम से नियुक्त 284 अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सोमवार को सुनवाई करते हुए उनकी नियुक्तियां रद्द करने संबंधी राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी। अदालत ने सरकार को मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया है।

यह मामला निरोज खेस समेत 284 अभ्यर्थियों की याचिका पर अदालत के सामने आया। इन अभ्यर्थियों ने सरकार के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसके कारण परीक्षा के बाद मिली उनकी नियुक्तियां रद्द कर दी गई थीं। हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद फिलहाल इन प्रार्थियों पर नियुक्ति रद्द करने वाला सरकारी निर्णय लागू नहीं होगा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पूर्व में इसी तरह के एक मामले में दिए गए संरक्षण का भी संज्ञान लिया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, पहले भी अदालत सरकार के ऐसे आदेश पर रोक लगा चुकी थी। अब उसी अंतरिम व्यवस्था का लाभ याचिका दायर करने वाले सभी 284 अभ्यर्थियों को देने का निर्णय किया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि राज्य सरकार की 18 अगस्त की घोषणा से जुड़ी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने उन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था, जिनमें टीडीपीएल की भूमिका बताई गई थी। इसके बाद कार्मिक प्रशासनिक विभाग ने परीक्षा रद्द करने, कुछ प्रक्रियाएं स्थगित रखने और जांच कराने से संबंधित अधिसूचना जारी की थी।

उस अधिसूचना में 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का उल्लेख था। जेएसएससी सीजीएल के माध्यम से नियुक्त अभ्यर्थियों ने इसी सरकारी कार्रवाई के खिलाफ न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। अदालत ने अभी विवाद के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है।

हाईकोर्ट की रोक से अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन मामला न्यायालय में विचाराधीन रहेगा। राज्य सरकार का जवाब दाखिल होने के बाद आगे की सुनवाई में उसके निर्णय और अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर विचार किया जाएगा। अंतिम नतीजा अदालत के आगामी आदेश पर निर्भर करेगा।