रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट में जेपीएससी की तीन नियुक्ति परीक्षाएं रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा प्रक्रिया तथा नियुक्तियां रद्द करने के आधार को लेकर अपने-अपने तर्क रखे। मामला 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा, फूड इंस्पेक्टर और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा है।
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अच्युत केशव ने अदालत में दावा किया कि परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई और गोपनीयता भी प्रभावित हुई। सरकार का पक्ष था कि इससे जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। उसकी दलील के अनुसार, पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों में दोषी और निर्दोष की अलग-अलग पहचान करना संभव नहीं था।
सरकार ने इसी आधार पर पूरी नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के निर्णय को उचित बताया। सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि मामले में सीआईडी की जांच अभी जारी है। हालांकि उपलब्ध विवरण में जांच पूरी होने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। सरकार की ओर से लगाए गए गड़बड़ी और गोपनीयता भंग होने के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि इन परीक्षाओं की चयन प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी और दस्तावेजों का सत्यापन चल रहा था। उनका तर्क था कि परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने का कोई ठोस मामला सामने नहीं आया और न ही अभ्यर्थियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी है। उन्होंने केवल संबंधित एजेंसी की भूमिका पर संदेह के आधार पर पूरी नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने का विरोध किया।
याचिकाकर्ताओं ने यह मुद्दा भी उठाया कि फैसला लेने से पहले प्रभावित पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने इसे नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध बताया। अब हाईकोर्ट में आगे की कार्यवाही और सीआईडी जांच की प्रगति इन नियुक्ति प्रक्रियाओं से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। उपलब्ध विवरण में अदालत के किसी अंतिम निर्णय या अगली सुनवाई की तारीख का उल्लेख नहीं है।