रांची में 35 कार्यरत पारा शिक्षकों ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की सहायक आचार्य नियुक्ति से जुड़े विज्ञापन के कुछ प्रावधानों को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी है। राम प्रकाश यादव समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने आरक्षण रोस्टर, अनारक्षित पदों पर चयन और न्यूनतम अंक की शर्तों पर सवाल उठाए हैं।
याचिका के अनुसार, कक्षा एक से पांच तक के लिए इंटरमीडिएट प्रशिक्षित सहायक आचार्य के 1,909 पद विज्ञापित किए गए हैं। इसमें अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1 और पिछड़ा वर्ग-2 के लिए रिक्तियों की संख्या शून्य दिखाई गई है। याचिकाकर्ताओं ने इन दोनों श्रेणियों के लिए पद नहीं रखने का आधार स्पष्ट करने की मांग की है।
इसी तरह स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य के सामाजिक विज्ञान विषय में 660 नियमित पदों का उल्लेख किया गया है। याचिका में दावा किया गया है कि यहां भी अत्यंत पिछड़ा वर्ग-1 और पिछड़ा वर्ग-2 के लिए कोई रिक्ति नहीं दर्शाई गई। इस व्यवस्था को आरक्षण रोस्टर से जोड़ते हुए न्यायालय के समक्ष आपत्ति रखी गई है।
पारा शिक्षकों ने विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों की पात्रता से संबंधित एक शर्त पर भी प्रश्न उठाया है। उनका कहना है कि आरक्षित श्रेणी के अंकों के आधार पर झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा या दूसरी शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों को केवल आरक्षित श्रेणी के पदों के योग्य मानने का प्रावधान पुनर्विचार योग्य है।
याचिकाकर्ताओं ने अपने लंबे शिक्षण अनुभव का हवाला देते हुए प्रश्नपत्रों में कम से कम 33 प्रतिशत अंक हासिल करने की अनिवार्यता में छूट की मांग भी की है। ये सभी मांगें फिलहाल याचिका में रखे गए पक्ष हैं; इनके गुण-दोष और विज्ञापन के प्रावधानों की वैधता पर निर्णय न्यायालय की सुनवाई के बाद ही होगा।
यह याचिका अधिवक्ता तान्या सिंह के माध्यम से दाखिल की गई है। मामला सहायक आचार्य बनने की प्रक्रिया में शामिल पारा शिक्षकों की पात्रता और विभिन्न श्रेणियों के लिए उपलब्ध पदों से जुड़ा है, इसलिए आगे की न्यायिक कार्यवाही नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।