धनबाद में 108 एंबुलेंस कर्मियों का कैंडल मार्च, मांगें नहीं मानी गईं तो सेवा रोकने की चेतावनी

रणधीर वर्मा चौक पर प्रदर्शन कर कर्मचारियों ने सरकारी स्तर से संचालन और वेतन भुगतान समेत कई मांगें उठाईं। संघ ने समाधान नहीं होने पर आंदोलन को राज्यव्यापी बनाने की चेतावनी दी।

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धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों ने शुक्रवार को कैंडल मार्च निकाला। कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया और समाधान नहीं होने पर राज्यभर में एंबुलेंस सेवा रोकने की चेतावनी दी। यह चेतावनी कर्मचारी संघ की ओर से दी गई है; सेवा बंद करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई।

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने सम्मान फाउंडेशन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और स्वास्थ्य मंत्री तथा कंपनी के विरोध में नारेबाजी की। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। ये दावे कर्मचारी पक्ष के हैं और उपलब्ध विवरण में कंपनी या स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष दिनेश यादव के अनुसार, कंपनी प्रबंधन को कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को राज्यव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। संघ ने प्रदर्शन के माध्यम से रोजगार से जुड़ी अपनी चिंताओं को प्रशासन और प्रबंधन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

संघ की प्रमुख मांगों में राज्य की 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन सरकारी स्तर पर करना शामिल है। कर्मचारियों ने वेतन भुगतान की व्यवस्था सिविल सर्जन के माध्यम से कराने की मांग भी रखी। इसके अतिरिक्त, सम्मान फाउंडेशन द्वारा सेवा से हटाए गए कर्मचारियों को उनके संबंधित जिलों में फिर से बहाल करने की मांग उठाई गई।

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने ईपीएफ, ईएसआई, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन से जुड़े लाभ सुनिश्चित करने की मांग की। संघ ने इन्हें श्रम और वैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय बताया। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इन मांगों पर संबंधित कंपनी या सरकारी स्तर से किसी निर्णय का उल्लेख नहीं है।

कैंडल मार्च में संघ के जिला मंत्री धरमजीत चौधरी, उपाध्यक्ष राघवेंद्र नारायण पांडेय, सह मंत्री मनोज कुमार साव और कोषाध्यक्ष प्रशांत नियोगी सहित कई पदाधिकारी शामिल हुए। संघ की चेतावनी के बाद आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।