जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं की जांच में अभय तिवारी के पिता की भागीदारी भी दायरे में

सीआईडी की जांच से जुड़े अदालती दस्तावेजों के अनुसार, अभय तिवारी के पिता ने टीडीपीएल द्वारा संचालित एफआरओ और एसीएफ प्रारंभिक परीक्षाओं में भाग लिया था। ओएमआर शीट और डिजिटल मूल्यांकन में कथित छेड़छाड़ की जांच जारी है।

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जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच से संबंधित सांकेतिक दृश्य

रांची में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान गिरफ्तार अभय तिवारी के परिवार से जुड़ा एक नया पहलू सामने आया है। अदालत के समक्ष पेश दस्तावेजों के आधार पर मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके पिता सुखदेव तिवारी ने वर्ष 2024 की एफआरओ और एसीएफ प्रारंभिक परीक्षाओं में हिस्सा लिया था। दोनों परीक्षाओं के संचालन में टीडीपीएल की भूमिका थी।

जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी पर अभ्यर्थियों से पैसे लेकर परीक्षा में सफलता और अंतिम चयन दिलाने का भरोसा देने का आरोप है। ये दावे अभी जांच के दायरे में हैं और इन्हें अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना गया है।

दस्तावेजों में एफआरओ परीक्षा की 350 से अधिक और एसीएफ परीक्षा की 150 से अधिक ओएमआर शीट में कथित हेरफेर का उल्लेख किया गया है। इस तरह दोनों परीक्षाओं की 500 से अधिक उत्तर पुस्तिकाएं जांच के घेरे में बताई गई हैं। मूल्यांकन प्रणाली और सर्वर में डिजिटल स्तर पर छेड़छाड़ किए जाने के आरोप की भी जांच चल रही है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अभय तिवारी पर प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए करीब पांच लाख रुपये तथा अंतिम चयन के लिए 10 लाख से 25 लाख रुपये मांगने का आरोप है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा व्यवस्था प्रभावित करने का भरोसा किस आधार पर दिया गया और कथित लेन-देन का परीक्षा परिणामों से कोई संबंध था या नहीं।

सीआईडी अभय तिवारी की पत्नी, भाई और अन्य रिश्तेदारों से जुड़े परीक्षा परिणामों की भी पड़ताल कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना बताया गया है कि उन्होंने किन परीक्षाओं में भाग लिया, उनके परिणाम क्या रहे और चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं। दस्तावेजों में कई रोल नंबर दर्ज होने की बात भी कही गई है।

अभय तिवारी के पिता का उन्हीं परीक्षाओं में शामिल होना, जिन्हें संबंधित एजेंसी ने संचालित किया था, अब जांच का एक अलग बिंदु बन गया है। सीआईडी उपलब्ध दस्तावेजों, ओएमआर रिकॉर्ड और डिजिटल प्रणाली से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। मामले में जांच पूरी होने और न्यायिक निष्कर्ष आने तक सभी आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।