जेपीएससी-जेएसएससी सुधार समिति जल्द गठित करने की मांग, रिफॉर्म्स मंच ने उठाए सवाल

रांची में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने प्रस्तावित परीक्षा सुधार समिति के गठन में देरी का आरोप लगाते हुए पारदर्शिता, समयबद्ध नियुक्ति और रिक्त पदों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।

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रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के सदस्य

रांची में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार के लिए प्रस्तावित समिति के गठन में देरी का मुद्दा उठाया है। बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच ने दावा किया कि घोषणा के करीब दो महीने बाद भी समिति के गठन की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

मंच की सदस्य अर्चना कुमारी के अनुसार, जेपीएससी की कार्यप्रणाली और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति बनाने की बात कही गई थी। प्रस्तावित समिति में छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की घोषणा हुई थी, लेकिन मंच का कहना है कि इस दिशा में अब तक ठोस पहल दिखाई नहीं दी है।

संगठन ने परीक्षा व्यवस्था से जुड़े पूर्व विवादों और अनियमितता के आरोपों का उल्लेख करते हुए संस्थागत सुधार की जरूरत बताई। मंच के सदस्यों ने कहा कि केवल अभ्यर्थियों के विरुद्ध कार्रवाई से व्यवस्था की सभी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उनके मुताबिक, भविष्य में गड़बड़ी रोकने के लिए परीक्षा प्रक्रिया में जवाबदेही तय करना भी आवश्यक है।

मंच ने मांग रखी कि सुधार समिति का शीघ्र गठन कर उसमें विभिन्न छात्र और अभ्यर्थी प्रतिनिधियों को स्थान दिया जाए। संगठन चाहता है कि नियुक्तियों की समय-सीमा निर्धारित हो तथा सुधार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिक्त पदों के लिए कैलेंडर जारी किया जाए। परीक्षाओं के परिणाम और नियुक्तियां भी निर्धारित अवधि में पूरी करने की मांग की गई है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेपीएससी और जेएसएससी के पदों की समीक्षा तथा रिक्तियों की विभागवार जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी उठी। मंच ने आयोगों में निष्पक्ष और गैर-राजनीतिक व्यक्तियों की नियुक्ति पर जोर दिया। ये सभी मांगें संगठन की ओर से रखी गई हैं; सरकार या संबंधित आयोगों की प्रतिक्रिया उपलब्ध विवरण में शामिल नहीं है।

रिफॉर्म्स मंच ने कहा कि प्रस्तावित समिति बनी तो छात्रों और अभ्यर्थियों की व्यावहारिक समस्याओं पर व्यवस्थित सुझाव सामने आ सकेंगे। संगठन ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में छात्र दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।