झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में सीआईडी ने हजारीबाग से दो सहोदर भाइयों को गिरफ्तार किया है। दोनों परीक्षा में सफल अभ्यर्थी बताए गए हैं। एजेंसी ओएमआर शीट में हेराफेरी और रुपये लेकर अभ्यर्थियों को पास कराने के आरोपों की जांच कर रही है।
सीआईडी की छानबीन के अनुसार, दोनों भाइयों ने एक एजेंट के माध्यम से प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए 10 से 15 लाख रुपये दिए थे। जांच एजेंसी को कथित एजेंट के बारे में जानकारी मिलने का दावा किया गया है और उसकी तलाश जारी है। गिरफ्तार अभ्यर्थियों के विरुद्ध लगे आरोपों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अभी बाकी है।
इस प्रकरण में सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच के दौरान आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष और तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी के निदेशक, विपणन प्रबंधक, तकनीकी प्रोग्रामर, अन्य कर्मचारी और कथित बिचौलिये भी गिरफ्तार लोगों में शामिल बताए गए हैं।
सीआईडी के मुताबिक, ताजा कार्रवाई के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 27 हो गई है। इनमें नौ सफल अभ्यर्थी बताए गए हैं। शनिवार को हुई दोनों गिरफ्तारियों के साथ हजारीबाग से पकड़े गए सफल अभ्यर्थियों की संख्या तीन हो गई है। अन्य गिरफ्तार अभ्यर्थियों का संबंध रांची, लोहरदगा और उत्तर प्रदेश सहित अलग-अलग स्थानों से बताया गया है।
जांच में सीट बेचने, पैसे लेकर परीक्षा पास कराने और ओएमआर शीट में बदलाव करने की कथित साजिश की पड़ताल की जा रही है। सीआईडी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में आयोग, परीक्षा एजेंसी और बिचौलियों से जुड़े कई लोगों ने मिलकर काम किया। हालांकि प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
हजारीबाग से हुई नई गिरफ्तारियां जांच के उस हिस्से से जुड़ी हैं जिसमें सफल अभ्यर्थियों और कथित एजेंटों के बीच संपर्क तथा भुगतान की भूमिका खंगाली जा रही है। एजेंट की तलाश और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच जारी रहने के कारण मामले में आगे भी कार्रवाई संभव है, लेकिन फिलहाल किसी अतिरिक्त गिरफ्तारी या निष्कर्ष की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।