साहिबगंज कॉलेज की 81 लाख की सिदो-कान्हू लाइब्रेरी छह माह बाद भी बंद

छात्रावास परिसर में डीएमएफटी मद से बनी लाइब्रेरी के खुलने का करीब 500 विद्यार्थियों को इंतजार है। छात्रों ने पानी और डिजिटल अध्ययन की सुविधा का मुद्दा भी उठाया है।

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साहिबगंज कॉलेज के छात्रावास परिसर में बना सिदो-कान्हू पुस्तकालय

साहिबगंज कॉलेज के छात्रावास परिसर में 81 लाख 33 हजार 100 रुपये की लागत से तैयार सिदो-कान्हू पुस्तकालय करीब छह महीने बाद भी विद्यार्थियों के लिए नहीं खुला है। डीएमएफटी मद से बने इस पुस्तकालय का उद्देश्य छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को परिसर के भीतर पढ़ाई की सुविधा देना है, लेकिन भवन तैयार होने के बावजूद इसका उपयोग शुरू नहीं हो सका है।

कॉलेज के तीन छात्रावासों में लगभग 500 विद्यार्थी रहते हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि पुस्तकालय चालू होने पर उन्हें अध्ययन के लिए दूसरी जगहों पर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने जिला और कॉलेज प्रशासन से इसे जल्द खोलने की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है।

छात्रों ने भवन में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी प्रश्न उठाए हैं। उनके अनुसार, पुस्तकालय में शौचालय बनाया गया है, लेकिन पानी के लिए बोरिंग की व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि पुस्तकालय खुलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्वीकृत राशि से पढ़ाई और अन्य जरूरतों के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

छात्रावास में रहने वाले बेजामिन हांसदा ने पुस्तकालय निर्माण पर खुशी जताते हुए कहा कि लंबे इंतजार के बाद भी इसे खोलने की पहल दिखाई नहीं दे रही है। सोनू कुमार रजक के अनुसार, छात्र इस विषय में जिला प्रशासन से मिलकर पुस्तकालय को चालू कराने का प्रयास करेंगे, ताकि परिसर में रहने वालों को इसका लाभ मिल सके।

नितेश रंजन ने खर्च और उपलब्ध सुविधाओं के बीच स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत बताई। वहीं मसूदन मर्मू ने पुस्तकालय में डिजिटल माध्यम से अध्ययन की व्यवस्था की अपेक्षा रखी है। विद्यार्थियों की मांग है कि भवन खोलने के साथ वहां जरूरी संसाधन भी सुनिश्चित किए जाएं।

साहिबगंज महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह के मुताबिक, जिला प्रशासन और कॉलेज प्रशासन पुस्तकालय को जल्द शुरू कराने के प्रयास में हैं। इसके लिए एक कमेटी भी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर पुस्तकालय खोलने का काम किया जाएगा, जिससे छात्रावास के विद्यार्थियों को अध्ययन की सुविधा मिल सके।