जेसीईआरटी और डायट में रिक्त पदों पर केंद्र ने जताई चिंता, नियमित भर्ती को कहा

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने झारखंड के शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थानों में लंबे समय से खाली फैकल्टी पदों की समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर नियमित नियुक्ति करने को कहा है।

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रांची स्थित शिक्षक-प्रशिक्षण व्यवस्था से संबंधित सांकेतिक दृश्य

रांची में राज्य के शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थानों की मानव संसाधन स्थिति को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने चिंता जताई है। मंत्रालय ने झारखंड सरकार से झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) के रिक्त फैकल्टी पदों की समीक्षा कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर भरने को कहा है।

हाल में हुई मंत्रालय की बैठक में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, जेसीईआरटी में फैकल्टी के 11 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें केवल चार पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं। इस तरह राज्य स्तरीय संस्थान के करीब 65 प्रतिशत स्वीकृत पद खाली बताए गए हैं। मंत्रालय का कहना है कि शिक्षक-प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए यहां पर्याप्त फैकल्टी जरूरी है।

डायट संस्थानों में भी रिक्तियों की संख्या बड़ी है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, शिक्षकों के 312 स्वीकृत पदों में 157 पद खाली हैं। केंद्र ने उल्लेख किया कि इन संस्थानों में पिछले तीन वर्षों से रिक्त पदों की संख्या अधिक बनी हुई है और नियुक्तियों को अब प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।

मंत्रालय ने प्रतिनियुक्ति पर निर्भरता समाप्त कर नियमित शिक्षकों की भर्ती की जरूरत बताई है। उसका आकलन है कि विद्यालयों के शिक्षकों को डायट में प्रतिनियुक्त करने से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो सकती है। राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को पदों की समीक्षा कर इसी वर्ष तक उन्हें भरने के लिए कहा गया है।

झारखंड के सभी जिलों के डायट को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की योजना है। इन संस्थानों को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र से अनुदान भी मिलता है। ऐसे में फैकल्टी के पद खाली रहने से उत्कृष्टता केंद्र बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। डायट में डीएलएड पाठ्यक्रम संचालित होता है, जिसके प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्राथमिक कक्षाओं के शिक्षकों के रूप में होती है।

राज्य सरकार डायट में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नियमावली तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो सकती है। केंद्र के निर्देश के बाद अब रिक्तियों की विभागीय समीक्षा और नियमित भर्ती की प्रक्रिया पर ध्यान रहेगा।