धनबाद के स्कूलों में मध्याह्न भोजन के खर्च पर नए नियम, स्पर्श पोर्टल से होगी निगरानी

वित्तीय वर्ष 2026-27 से विद्यालयों के मध्याह्न भोजन संबंधी भुगतान और समायोजन एसएनए स्पर्श प्रणाली के तहत होगा। हर बिल पर तीन पदाधिकारियों के हस्ताक्षर जरूरी किए गए हैं।

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धनबाद में मध्याह्न भोजन योजना के खर्च प्रबंधन की प्रतीकात्मक तस्वीर

धनबाद में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण यानी मध्याह्न भोजन योजना के खर्च और उसकी निगरानी के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय के आदेश के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 से विद्यालय स्तर के व्यय का प्रबंधन एसएनए स्पर्श प्रणाली के तहत किया जाएगा। इसके लिए स्कूलों और प्रखंड कार्यालयों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

प्रखंड स्तर पर होने वाली मासिक गुरु गोष्ठी में प्रभारी प्रधानाध्यापकों को नई प्रक्रिया की जानकारी देने का निर्देश है। विद्यालय प्रधानों को व्यय रिपोर्ट के साथ वेंडर का नाम और भुगतान का विवरण लेकर बैठक में उपस्थित होना होगा। इससे खर्च से जुड़े दस्तावेजों की जांच और आगे की प्रक्रिया एक निर्धारित तरीके से पूरी की जा सकेगी।

आदेश के मुताबिक, एक अप्रैल से पहले की बची हुई राशि और चालू वित्तीय वर्ष में मिले आवंटन का समायोजन करना जरूरी होगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित बिल प्रखंड कार्यालय भेजे जाएंगे। केंद्रांश और राज्यांश की राशि क्रमशः 60 और 40 प्रतिशत के अनुपात में है। इसका आवंटन स्पर्श पोर्टल पर प्रखंड की मेकर आईडी से जिला कार्यालय को भेजा जाएगा।

विद्यालय स्तर से प्रस्तुत प्रत्येक बिल पर विद्यालय प्रबंधन से जुड़े तीन पदाधिकारियों—अध्यक्ष, संयोजिका और प्रभारी प्रधानाध्यापक—के हस्ताक्षर अनिवार्य किए गए हैं। राशन, सब्जी और रसोई गैस के लिए अलग-अलग बिल तैयार करने होंगे। बिना निर्धारित हस्ताक्षरों और श्रेणीवार दस्तावेजों के बिल प्रक्रिया में शामिल नहीं किए जाएंगे।

प्रखंड कार्यालय में प्राप्त बिलों और प्रतिवेदनों का रिकॉर्ड मध्याह्न भोजन योजना के कंप्यूटर ऑपरेटर संभालेंगे। बिलों को पोर्टल पर अपलोड करने से लेकर जिला कार्यालय तक भेजने की प्रक्रिया में विद्यालय और प्रखंड स्तर के कर्मियों को आपसी तालमेल के साथ काम करने को कहा गया है।

जिला शिक्षा अधीक्षक शालिनी डुंगडुंग ने सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों, कार्यक्रम अधिकारियों, सीआरपी, बीआरपी और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को समन्वय बनाकर काम करने का निर्देश दिया है। नई व्यवस्था का केंद्र विद्यालयवार खर्च के दस्तावेजों का समायोजन, निर्धारित हस्ताक्षर और पोर्टल के माध्यम से आवंटन तथा निगरानी सुनिश्चित करना है।