धनबाद जिले के झरिया रिसोर्स सेंटर में मंगलवार को आयोजित शिविर में 52 दिव्यांग बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण दिए गए। झारखंड शिक्षा परियोजना के समावेशी शिक्षा कार्यक्रम के तहत हुए इस आयोजन में तीन से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को शामिल किया गया। सामग्री मिलने पर बच्चों और उनके अभिभावकों में खुशी देखी गई।
शिविर में सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के साथ शारीरिक और मानसिक दिव्यांगता वाले, मूक-बधिर तथा दृष्टिबाधित बच्चे पहुंचे। आयोजकों ने बच्चों की अलग-अलग आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपयोगी उपकरण और शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई।
वितरित सामग्री में सीपी चेयर, ट्राइसाइकिल, कैलिपर्स, व्हीलचेयर, बैसाखी और रोलेटर शामिल थे। सुनने में कठिनाई वाले बच्चों को श्रवण यंत्र दिए गए, जबकि दृष्टिबाधित बच्चों के लिए ब्रेल किट और ब्लाइंड स्टिक उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त स्पेशल किट और टीएलएम किट समेत अन्य सहायक सामग्री भी बांटी गई।
झरिया के बीपीओ सुजीत कुमार महतो ने बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, उपयुक्त सहायक उपकरण दैनिक गतिविधियों को आसान बनाने के साथ बच्चों को अधिक आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
बीबी वार्ड के पार्षद मुनि लाल रविदास ने भी अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई और पुनर्वास की प्रक्रिया पर लगातार ध्यान रखने को कहा। उन्होंने नियमित रूप से रिसोर्स सेंटर के संपर्क में रहने का सुझाव दिया, ताकि बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सुविधाएं और मार्गदर्शन मिलता रहे।
कार्यक्रम में रिसोर्स सेंटर के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. मनोज सिंह, स्पेशल एजुकेटर अखलाक अहमद तथा एलिम्को की रांची टीम के सदस्य मौजूद रहे। शिविर का केंद्र बच्चों को दैनिक जीवन, आवाजाही, सुनने-देखने और सीखने से जुड़ी जरूरतों के लिए जरूरी साधन उपलब्ध कराना रहा।