झारखंड आंदोलनकारी 12 नवंबर से कोल्हान आयुक्त कार्यालय के सामने देंगे धरना

खरसावां में हुई बैठक में झारखंड आंदोलनकारियों ने सम्मान राशि, आश्रितों की नियुक्ति, स्थानीय नीति, पेसा और वन अधिकार से जुड़ी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की।

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खरसावां डाक बंगला में बैठक करते झारखंड आंदोलनकारी

झारखंड आंदोलन से जुड़े आंदोलनकारी अपनी लंबित मांगों को लेकर 12 नवंबर से चाईबासा स्थित कोल्हान आयुक्त कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे। आंदोलन की रूपरेखा खरसावां डाक बंगला में धनपति सरदार की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय की गई। इसके बाद अभियान को चरणबद्ध तरीके से राज्य के अन्य जिलों तक ले जाने की बात कही गई है।

बैठक में आंदोलनकारियों ने कहा कि छह सूत्री मांगों को लेकर 22 अगस्त को मुख्यमंत्री सचिवालय में ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन उनकी अपेक्षा के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई। पहले दो नवंबर से रांची में धरना देने की योजना थी। निर्धारित स्थल की अनुमति नहीं मिलने के बाद अलग-अलग जिलों में आंदोलन करने का निर्णय लिया गया।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में मासिक सम्मान राशि बढ़ाकर कम से कम 20 हजार रुपये करना शामिल है। उन्होंने प्रत्येक आंदोलनकारी के एक आश्रित को उसकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी में सीधी नियुक्ति देने की मांग भी रखी। बैठक में राज्य निर्माण में योगदान देने वाले आंदोलनकारियों और उनके परिवारों के सम्मान तथा भविष्य का मुद्दा उठाया गया।

स्थानीय और नियोजन नीति को वर्ष 1932 के खतियान पर आधारित करने की मांग भी बैठक में दोहराई गई। आंदोलनकारियों ने पेसा नियमावली-2025 में संशोधन कर पेसा कानून-1996 की मूल भावना और उसके 23 प्रमुख प्रावधान लागू करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि संवैधानिक अधिकार मिलने से ग्रामसभाएं स्थानीय स्तर के निर्णय अधिक प्रभावी ढंग से ले सकेंगी।

बैठक में वन अधिकार अधिनियम-2006 का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने और अगले 50 वर्षों तक भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने की मांग रखी गई। आंदोलनकारियों ने इन विषयों को जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार से ठोस पहल करने को कहा।

खरसावां की बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से आए कई आंदोलनकारी शामिल हुए। घोषित कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन का पहला धरना 12 नवंबर को चाईबासा में होगा। बैठक में लिए गए निर्णय के मुताबिक इसके बाद मांगों को लेकर आंदोलन का दायरा अन्य जिलों में बढ़ाया जाएगा।