पलामू टाइगर रिजर्व में टाइगर सेल गठित, 10 विशेषज्ञ करेंगे बाघों की गतिविधियों की निगरानी

बेतला नेशनल पार्क में टाइगर सेल का मुख्यालय बनाया गया है। अलग-अलग क्षेत्रों के 10 प्रशिक्षित विशेषज्ञ बाघों की गतिविधियों पर नजर रखकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे।

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पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों की निगरानी के लिए गठित टाइगर सेल से संबंधित दृश्य

पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों की गतिविधियों की व्यवस्थित निगरानी और संरक्षण कार्यों को तकनीकी सहयोग देने के लिए टाइगर सेल का गठन किया गया है। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के 10 प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैनात किए गए हैं। सेल का मुख्यालय बेतला नेशनल पार्क में रहेगा और यहीं से पूरे झारखंड में दर्ज होने वाली बाघों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, टाइगर सेल बनाने का निर्णय वर्ष 2023 में टाइगर फाउंडेशन की बैठक में लिया गया था। इसके बाद पलामू टाइगर रिजर्व से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को विभिन्न जिम्मेदारियों के लिए प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण और आकलन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इस विशेष इकाई का गठन किया गया है।

सेल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जीव विज्ञान, मैदानी निगरानी, घास के मैदानों के प्रबंधन, पर्यटन, मार्गदर्शन, वन्यजीव बचाव और पशु चिकित्सा जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। यह टीम आधुनिक तकनीकों की मदद से बाघों की आवाजाही और दूसरी गतिविधियों का अध्ययन करेगी तथा प्रत्येक महत्वपूर्ण जानकारी की रिपोर्ट तैयार करेगी।

तैयार रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाएगी। टीम बाघ संरक्षण और उनकी संख्या बढ़ाने से जुड़े प्रयासों पर अन्य वनकर्मियों को सुझाव देने के साथ प्रशिक्षण भी देगी। पलामू टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना को टाइगर सेल की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।

राज्य में बाघों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से टाइगर सप्लीमेंटेशन कार्यक्रम भी शुरू किया गया है। इसके तहत पलामू टाइगर रिजर्व में दो बाघिन और एक बाघ लाने की योजना है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इन्हें पहले सॉफ्ट रिलीज सेंटर में रखा जाना है। इस कार्यक्रम के लिए विशेषज्ञों की एक टीम के रिजर्व पहुंचने की भी संभावना बताई गई है।

पलामू टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के वन्यजीव गलियारे से जुड़ा है। वर्ष 2021 के बाद रिजर्व क्षेत्र में सात बाघों की आवाजाही दर्ज होने की जानकारी दी गई है, जबकि इस अवधि में किसी बाघिन के पहुंचने का रिकॉर्ड नहीं बताया गया। नई टाइगर सेल से निगरानी, आंकड़ों के संकलन और संरक्षण से जुड़े निर्णयों को अधिक केंद्रित बनाने की अपेक्षा है।