रांची में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की समीक्षा के बाद झारखंड के कमजोर स्वास्थ्य संकेतक वाले क्षेत्रों के लिए विशेष और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि योजनाओं के प्रदर्शन का आकलन केवल राज्य स्तरीय आंकड़ों तक सीमित न रखकर जिला, क्षेत्र, आबादी और स्वास्थ्य केंद्र के स्तर पर किया जाए।
बैठक में शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु अनुपात, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर, कुल प्रजनन दर, जन्म के समय जीवन प्रत्याशा, संस्थागत प्रसव और पूर्ण टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा की गई। इन संकेतकों की राष्ट्रीय आंकड़ों से तुलना करते हुए बेहतर और कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों को अलग-अलग चिह्नित करने पर जोर दिया गया।
समीक्षा के अनुसार शिशु मृत्यु दर, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर और संस्थागत प्रसव के मामले में झारखंड राष्ट्रीय स्तर से पीछे है। संस्थागत प्रसव में राज्य का अंतर 13 प्रतिशत बताया गया, जबकि जन्म के समय जीवन प्रत्याशा राष्ट्रीय स्तर से दो वर्ष कम है। मातृ मृत्यु अनुपात और पूर्ण टीकाकरण में राज्य की स्थिति बेहतर बताई गई।
विभाग अब कमजोर जिलों की पहचान कर वहां की भौगोलिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों का विश्लेषण करेगा। ग्रामीण तथा आदिवासी इलाकों, संबंधित आयु समूहों और स्वास्थ्य संस्थानों के स्तर पर कमियां देखी जाएंगी। बेहतर और कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों की तुलना करके अंतर के कारण तलाशने और उसी आधार पर समाधान निर्धारित करने की योजना है।
प्रत्येक स्वास्थ्य संकेतक के लिए वर्ष 2030 तक स्पष्ट उद्देश्य, मापने योग्य लक्ष्य और समयसीमा तय करने को कहा गया है। इन लक्ष्यों की हर दो वर्ष में विस्तृत समीक्षा होगी। एनएचएम के विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़े राज्य नोडल अधिकारियों को हर महीने जिलों का दौरा कर सेवा वितरण, आधारभूत संरचना, मानव संसाधन और समुदाय स्तर की समस्याओं का आकलन करने का निर्देश भी मिला है।
कार्ययोजना में टेली-एसएनसीयू जैसी तकनीकी व्यवस्था के उपयोग के साथ एएनएम, सहिया और अन्य अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर रहेगा। सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने तथा जरूरत वाले क्षेत्रों में गैर-सरकारी संगठनों और विकास साझेदारों को लक्ष्य आधारित जिम्मेदारी देने का निर्देश भी दिया गया है।