झारखंड के वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और कर्मचारी बुधवार को शैक्षणिक हड़ताल पर रहे। वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अनुसार, इस आंदोलन के कारण राज्य के लगभग 1,250 हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में पठन-पाठन बाधित हुआ। मोर्चा ने हड़ताल में करीब 10 हजार शिक्षक-कर्मचारियों के शामिल होने की जानकारी दी है।
मोर्चा का कहना है कि उसने पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर रांची स्थित लोक भवन के सामने धरना-प्रदर्शन करने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी थी। अनुमति नहीं मिलने के विरोध में संगठन ने बुधवार को शैक्षणिक कामकाज रोकने का निर्णय लिया।
हड़ताल के बाद मोर्चा ने आंदोलन के अगले चरण की भी घोषणा की। संगठन के मुताबिक, पांच सितंबर को राज्य के सभी वित्त रहित शिक्षण संस्थानों में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें शिक्षक-कर्मचारियों के साथ विद्यार्थियों की भागीदारी भी प्रस्तावित है।
बुधवार शाम मोर्चा की बैठक में हड़ताल की समीक्षा की गई। इसके साथ ही शिक्षक दिवस पर प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। बैठक में संगठन से जुड़े विभिन्न पदाधिकारी और शिक्षक शामिल हुए।
मोर्चा की प्रमुख मांगों में वित्त रहित संस्थानों को मिलने वाली अनुदान राशि में 75 प्रतिशत वृद्धि शामिल है। संगठन शिक्षक और कर्मचारियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने तथा वित्त रहित स्कूलों और कॉलेजों के संचालन के लिए नियमावली बनाने की भी मांग कर रहा है।
इसके अलावा मोर्चा ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल के बोर्ड सदस्यों का जल्द मनोनयन करने की मांग रखी है। संगठन ने फिलहाल पांच सितंबर के संस्थानस्तरीय धरने का कार्यक्रम घोषित किया है। राज्य सरकार या जिला प्रशासन की ओर से इन मांगों और प्रस्तावित कार्यक्रम पर किसी प्रतिक्रिया का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।