झारखंड में स्कूल प्रमाणीकरण कार्यक्रम के तहत 1,400 सरकारी विद्यालयों का मूल्यांकन पूरा कर लिया गया है। इस प्रक्रिया में इन स्कूलों के करीब 2.25 लाख बच्चों के शिक्षण स्तर का भी आकलन हुआ। नामांकन, प्रशिक्षण और मूल्यांकन का चरण समाप्त होने के बाद अब जुटाए गए तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।
कार्यक्रम में राज्य के सभी 24 जिलों के नामांकित विद्यालय शामिल हैं। अंतिम स्कोर तय करने के लिए बच्चों के मूल्यांकन के साथ स्कूल के वातावरण, उपलब्ध सुविधाओं तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपस्थिति का विश्लेषण किया जाएगा। इसी समग्र प्रदर्शन के आधार पर विद्यालयों का प्रमाणीकरण होगा।
मूल्यांकन में केवल शैक्षणिक परिणामों को आधार नहीं बनाया गया है। स्कूलों में साफ-सफाई, शौचालय और पेयजल की स्थिति, बिजली, इंटरनेट एवं कंप्यूटर की उपलब्धता जैसे बिंदुओं को भी देखा गया। इसके अतिरिक्त सामुदायिक सहभागिता और बच्चों के परिणाम भी आकलन का हिस्सा हैं।
अंतिम मूल्यांकन के बाद स्कूलों को गोल्ड, सिल्वर और कांस्य श्रेणी के प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन के अनुसार, मूल्यांकन चरण पूरा होने के बाद कार्यक्रम अगले चरण में पहुंच गया है। विद्यालयों की प्रमाणीकरण प्रक्रिया अगले महीने तक पूरी होने की संभावना है।
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग यह कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष आयोजित करता है। इसका उद्देश्य बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार के साथ विद्यालयों के बीच नवाचार और बेहतर सुविधाओं को लेकर सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। अलग-अलग मानकों पर प्रदर्शन की समीक्षा से स्कूलों की मजबूत और सुधार योग्य स्थितियों की पहचान भी होगी।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है, जिसका उपयोग सुविधाओं को और बेहतर बनाने में किया जाता है। गोल्ड श्रेणी हासिल करने वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को राज्य स्तर पर पुरस्कृत भी किया जाएगा। अंतिम श्रेणी अब विश्लेषण और स्कोरिंग पूरी होने के बाद घोषित होगी।