देवघर समेत झारखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और झारखंड बालिका आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं का ऑनलाइन दक्षता आकलन शुरू किया गया है। इसके दायरे में कक्षा छह से 12 तक की छात्राएं होंगी। आकलन हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञान विषयों में किया जाएगा।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं की शैक्षणिक दक्षता का पता लगाने के साथ उन विषयों और हिस्सों की पहचान करना है, जिनमें उन्हें अतिरिक्त सहायता की जरूरत है। ऑनलाइन टेस्ट से मिले परिणामों के आधार पर छात्राओं के स्तर के अनुरूप सुधारात्मक और दूसरी शैक्षणिक गतिविधियों की योजना तैयार की जाएगी।
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक ने कार्यक्रम को लेकर सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। योजना में खास तौर पर चार प्रमुख विषयों की बुनियादी समझ मजबूत करने पर जोर दिया गया है, ताकि चिह्नित कमियों पर विद्यालय स्तर से व्यवस्थित ढंग से काम हो सके।
स्टूडेंट लर्निंग आउटकम इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम के संचालन की जिम्मेदारी एक स्वयंसेवी संस्था को दी गई है। संस्था अगले तीन वर्षों तक कार्यक्रम चलाएगी। ऑनलाइन आकलन के बाद प्राप्त निष्कर्षों के अनुसार आगे की शिक्षण गतिविधियां तय की जाएंगी और छात्राओं की सीखने की क्षमता का मूल्यांकन किया जाएगा।
कार्यक्रम की निगरानी के लिए जिला स्तर पर बालिका शिक्षा प्रभाग प्रभारी को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। प्रत्येक विद्यालय में भी एक शिक्षिका नोडल शिक्षक की भूमिका निभाएंगी। राज्य स्तर पर इसके समन्वय की जिम्मेदारी रीतांकर को दी गई है, जिससे जिला और विद्यालय स्तर की गतिविधियों के बीच तालमेल रखा जा सके।
यह कार्यक्रम पूरी तरह गैर-वित्तीय रखा गया है। इसके क्रियान्वयन के लिए जिले या विद्यालय को कोई खर्च नहीं उठाना होगा। ऑनलाइन आकलन और उसके बाद की सुधारात्मक गतिविधियों से आवासीय विद्यालयों की छात्राओं, विशेषकर ग्रामीण तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाली छात्राओं की विषयगत समझ बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है।