देवघर: झारखंड के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के संचालन की समीक्षा में संसाधनों के अपेक्षित उपयोग नहीं होने की बात सामने आई है। अगस्त के आंकड़ों के अनुसार, स्मार्ट क्लास की सुविधा वाले राज्य के 6,130 स्कूलों में से केवल 1,536 स्कूलों में इसका शिक्षण कार्य के लिए इस्तेमाल किया गया। यह कुल स्कूलों का 25.1 प्रतिशत है।
विभागीय समीक्षा में यह भी पाया गया कि 87.3 प्रतिशत स्कूलों में स्मार्ट क्लास का उपयोग निर्धारित 16 पीरियड के मानक से कम रहा। खूंटी और गोड्डा में स्थिति अधिक चिंताजनक बताई गई है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों जिलों के 98 से 100 प्रतिशत तक स्कूल विद्यार्थियों को योजना का अपेक्षित लाभ नहीं दे पा रहे हैं।
योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा नौ सितंबर को विभागीय सचिव की अध्यक्षता में हुई थी। इसके बाद झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने 10 सितंबर को पत्र जारी किया। पत्र में स्मार्ट क्लास के कम उपयोग और आईसीटी इंस्ट्रक्टरों को गैर-शैक्षणिक काम में लगाए जाने पर आपत्ति दर्ज की गई है।
स्कूलों में कंप्यूटर और आईसीटी आधारित पढ़ाई के लिए आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से नियुक्त इंस्ट्रक्टरों से कुछ जिला और प्रखंड कार्यालयों में क्लर्क का काम कराने की बात भी समीक्षा में सामने आई। संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों से पूछा गया है कि इन इंस्ट्रक्टरों को कार्यालयों में किन परिस्थितियों में प्रतिनियुक्त किया गया।
स्थिति सुधारने के लिए प्रत्येक जिले में सहायक कंप्यूटर प्रोग्रामर या तकनीकी विशेषज्ञ को आईसीटी योजना का नोडल पदाधिकारी बनाने का निर्देश दिया गया है। नोडल पदाधिकारी स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के संचालन की नियमित निगरानी करेंगे तथा प्रगति से जुड़ी साप्ताहिक रिपोर्ट जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपेंगे।
योजना की अगली विस्तृत समीक्षा 15 सितंबर को प्रस्तावित ऑनलाइन बैठक में होगी। इसमें जिलों के नोडल पदाधिकारी शामिल होंगे और स्मार्ट क्लास के वास्तविक उपयोग की स्थिति पर चर्चा की जाएगी। विभाग ने लापरवाही सामने आने पर संबंधित प्रतिष्ठानों और पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।