रांची में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को पंचायत व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया समझाने के लिए मॉडल यूथ ग्राम सभा आयोजित करने की तैयारी पूरी कर ली है। कार्यक्रम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पंचायती राज और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट एंड पंचायती राज के सहयोग से लागू किया जाएगा।
पहले चरण में राज्य के 248 पीएम श्री विद्यालयों को इस पहल से जोड़ा जा रहा है। इन विद्यालयों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक पढ़ने वाले विद्यार्थी गतिविधियों में भाग लेंगे। उद्देश्य यह है कि छात्र स्थानीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को केवल पाठ्यक्रम में न पढ़ें, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अनुभव भी प्राप्त करें।
विद्यालयों में होने वाली मॉडल ग्राम सभा के दौरान विद्यार्थी मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव और स्वास्थ्य कार्यकर्ता जैसी अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाएंगे। स्कूल तथा आसपास के क्षेत्र से जुड़े मुद्दे सभा के सामने रखे जाएंगे। छात्र उन पर चर्चा करेंगे, सुझाव प्रस्तुत करेंगे और सामूहिक सहमति से समाधान तक पहुंचने का प्रयास करेंगे।
कार्यक्रम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि पंचायत स्तर पर किसी समस्या को किस तरह उठाया जाता है, उस पर विचार-विमर्श कैसे होता है और साझा निर्णय की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है। अधिकारियों के अनुसार, गतिविधि आधारित अभ्यास से छात्रों में नेतृत्व, संवाद, टीमवर्क और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।
मॉडल यूथ ग्राम सभा के संचालन के लिए शिक्षकों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण में आयोजन की रूपरेखा, विद्यार्थियों के बीच भूमिकाओं के बंटवारे और बैठक को प्रभावी तरीके से संचालित करने की जानकारी दी गई। इससे विद्यालय स्तर पर गतिविधि को तय प्रक्रिया के अनुरूप चलाने में सहायता मिलेगी।
पीएम श्री राजकीय उन्नत उच्च विद्यालय पिस्का के प्राचार्य धनंजय कुमार के अनुसार, विद्यार्थियों को स्थानीय शासन की वास्तविक कार्यप्रणाली बताने के लिए जनप्रतिनिधियों को भी विद्यालय में आमंत्रित किया जा रहा है। उनके साथ संवाद के माध्यम से बच्चों को पंचायतों की भूमिका और नागरिक जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल विद्यार्थियों को जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार करने में उपयोगी होगी।