रांची विश्वविद्यालय के 39वें दीक्षांत समारोह में 58 विद्यार्थियों को मिलेगा गोल्ड मेडल

रांची विश्वविद्यालय के 39वें दीक्षांत समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। समारोह में 44 छात्राओं और 14 छात्रों समेत 58 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल दिया जाएगा।

2 मिनट पढ़ें 3 बार पढ़ी गई
रांची विश्वविद्यालय के 39वें दीक्षांत समारोह की तैयारी से जुड़ी प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची विश्वविद्यालय के 39वें दीक्षांत समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। विश्वविद्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस बार 58 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान किया जाएगा। इनमें 44 छात्राएं और 14 छात्र हैं। गोल्ड मेडल पाने वालों में छात्राओं की संख्या छात्रों के मुकाबले तीन गुना से अधिक है।

समारोह में नियमित श्रेणी के 58 गोल्ड मेडल के अतिरिक्त 13 प्रायोजित गोल्ड मेडल भी दिए जाएंगे। इस तरह विद्यार्थियों को कुल 71 गोल्ड मेडल प्रदान किए जाने हैं। शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर सामान्य और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की मास्टर डिग्री के लिए एक-एक विद्यार्थी को समग्र सर्वश्रेष्ठ का सम्मान भी मिलेगा।

विभिन्न पाठ्यक्रमों के चयनित विद्यार्थियों को समारोह में डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। इनमें मानविकी के मास्टर ऑफ आर्ट्स के 15, सामाजिक विज्ञान के नौ और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के 12 विद्यार्थी शामिल हैं। मास्टर ऑफ कॉमर्स के एक, विज्ञान के छह और विज्ञान के व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के चार विद्यार्थियों को भी डिग्री मिलेगी। एमबीए, एमसीए और मास्टर ऑफ लॉ से एक-एक विद्यार्थी सूची में हैं।

विश्वविद्यालय ने एमबीबीएस, विधि, शिक्षा, बीबीए, एलएलबी और बीडीएस में एक-एक विद्यार्थी को सर्वश्रेष्ठ स्नातक सम्मान के लिए चुना है। एमडी और एमएस के दो विद्यार्थियों को समग्र गोल्ड मेडलिस्ट के रूप में सम्मानित किया जाएगा। आईआईएम कोलकाता के निदेशक प्रो. आलोक राय और एनईपीए की कुलपति प्रो. शशिकला को डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की मानद उपाधि देने की भी तैयारी है।

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार समारोह के मुख्य अतिथि होंगे और विद्यार्थियों को डिग्री तथा मेडल प्रदान करेंगे। समारोह में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं के लिए पारंपरिक परिधान का ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इससे आयोजन की गरिमा के साथ भारतीय परंपरा पर भी जोर दिया जाएगा।

दीक्षांत समारोह के खर्च को सिंडिकेट की बैठक में मंजूरी दी गई है। पिछले सत्र में आयोजन पर करीब 52 लाख रुपये खर्च हुए थे, जबकि इस बार बजट घटाकर 45 लाख 50 हजार रुपये रखा गया है। विश्वविद्यालय के अनुसार वास्तविक खर्च निर्धारित बजट से भी कम रहने का अनुमान है। प्रशासन अब कार्यक्रम की रूपरेखा और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटा है।