झारखंड के 3,365 स्कूलों में बने प्रहरी क्लब, निजी और तकनीकी संस्थानों तक विस्तार की तैयारी

विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक करने के लिए झारखंड के 3,365 विद्यालयों में प्रहरी क्लब गठित किए गए हैं। अब निजी एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों को भी अभियान से जोड़ने की तैयारी है।

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झारखंड के स्कूलों में नशे के खिलाफ जागरूकता के लिए प्रहरी क्लब अभियान

रांची में राज्य के स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के अभियान का दायरा बढ़ाने की तैयारी की गई है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से मुख्य सचिव को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड के 3,365 विद्यालयों में प्रहरी क्लब गठित किए जा चुके हैं। इन क्लबों के माध्यम से विद्यार्थियों को नशे के खतरे और उससे बचाव की जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है।

अब सरकारी विद्यालयों के साथ निजी स्कूलों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में भी प्रहरी क्लब बनाने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग प्रकार के शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को जागरूकता अभियान से जोड़ना है। स्कूलों और कॉलेजों में नियमित अंतराल पर गतिविधियां आयोजित करने की भी योजना है।

मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को कक्षा नौवीं से उच्चतर कक्षाओं के पाठ्यक्रम में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ जागरूकता से संबंधित विषय शामिल करने का निर्देश दिया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शिक्षण संस्थानों में 15 दिन या एक महीने के अंतराल पर जागरूकता अभियान चलाने को भी कहा गया है।

अभियान को विद्यालय परिसरों से बाहर आम लोगों तक पहुंचाने की तैयारी भी है। इसके तहत कचरा संग्रह करने वाले वाहनों पर जागरूकता बैनर लगाने और ऑडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से संदेश प्रसारित करने का निर्देश दिया गया है। इस व्यवस्था से सार्वजनिक स्थानों और आवासीय क्षेत्रों तक नशे से बचाव का संदेश पहुंचाने का प्रयास होगा।

स्वास्थ्य केंद्रों पर बैनर और पोस्टर लगाने के साथ माइकिंग के माध्यम से भी जागरूकता फैलाने की योजना बनाई गई है। अभियान में सरकारी संस्थानों के अलावा निजी तथा तकनीकी शिक्षण संस्थानों को शामिल करने की बात कही गई है, ताकि विद्यार्थियों के साथ व्यापक आबादी तक भी जानकारी पहुंच सके।

इस संबंध में सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों के साथ राज्य औषधि निदेशालय को आवश्यक कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई है। विभागीय स्तर पर प्रहरी क्लबों के विस्तार, नियमित जागरूकता कार्यक्रम और पाठ्यक्रम में संबंधित विषय जोड़ने के निर्देशों पर आगे की कार्रवाई की जानी है।