झारखंड के 81 विधानसभा क्षेत्रों में 405 नए पावर सब स्टेशन बनाने की तैयारी

जेबीवीएनएल ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम पांच पावर सब स्टेशन बनाने की दिशा में कार्रवाई शुरू करने को कहा है। योजना पर 1,012 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

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झारखंड में बिजली आपूर्ति के लिए पावर सब स्टेशन विस्तार की सांकेतिक तस्वीर

झारखंड के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर नए पावर सब स्टेशन बनाने की तैयारी की गई है। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम पांच नए पावर सब स्टेशन स्थापित करने का निर्णय लिया है। 81 विधानसभा क्षेत्रों के आधार पर इनकी न्यूनतम संख्या 405 होगी।

इस योजना पर 1,012 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। ऊर्जा विकास निगम के सीएमडी के श्रीनिवासन ने अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है। जेबीवीएनएल के निदेशक, वितरण एवं परियोजना, प्रभात कुमार श्रीवास्तव ने भी विद्युत आपूर्ति क्षेत्रों के महाप्रबंधक-सह-मुख्य अभियंताओं को 11 सितंबर को पत्र भेजा है।

पत्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति को विभाग की प्राथमिकता बताया गया है। इसके अनुसार, लोड को ध्यान में रखते हुए शहरी क्षेत्रों में 33/11 केवी लाइन की लंबाई पांच से 10 किलोमीटर और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 किलोमीटर तक रखना आवश्यक माना गया है। विभाग का आकलन है कि इससे उपभोक्ताओं को उचित वोल्टेज के साथ बिजली देने में मदद मिलेगी।

नए सब स्टेशनों के लिए जमीन का चयन संबंधित विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से विचार-विमर्श के बाद करने का निर्देश है। जिलों के उपायुक्तों से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पांच सब स्टेशनों के निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध करने को भी कहा गया है। अधिकारियों को जमीन की उपलब्धता और अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मुख्यालय भेजनी होगी।

रांची जिले में रांची, हटिया, कांके, खिजरी, सिल्ली, तमाड़ और मांडर समेत सात विधानसभा क्षेत्र हैं। जिले में अभी कुल 87 पावर सब स्टेशन बताए गए हैं, जिनमें 41 शहरी क्षेत्र में हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जिले में 35 अतिरिक्त सब स्टेशन जुड़ सकते हैं और कुल संख्या 122 तक पहुंच सकती है।

योजना अभी कार्रवाई और जमीन चयन के चरण में है। निर्माण का अगला रास्ता उपयुक्त भूमि की उपलब्धता तथा जिलों से मिलने वाली अनुपालन रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। विभाग ने इस प्रक्रिया में शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों की बिजली जरूरतों को शामिल किया है।