रांची: झारखंड के सरकारी विभागों तथा जिला और क्षेत्रीय कार्यालयों में काम करने वाले हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन तीन महीने से लंबित होने का दावा किया गया है। झारखंड राज्य आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मामले में हस्तक्षेप करने और अक्टूबर तक का बकाया वेतन दीपावली से पहले दिलाने की मांग की है।
संघ के मुताबिक, कर्मचारियों ने आर्थिक तंगी के बीच दुर्गा पूजा बिताई और अब उन्हें दीपावली से पहले भुगतान की उम्मीद है। कंप्यूटर संचालन, डेटा प्रविष्टि, सरकारी अभिलेखों के रखरखाव, पत्राचार और दूसरे कार्यालयी कार्यों में लगे ये कर्मचारी सीमित मानदेय से अपने परिवारों का खर्च चलाते हैं।
कर्मचारी संगठन का कहना है कि तीन महीने से पारिश्रमिक नहीं मिलने के कारण घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में परेशानी हो रही है। संघ ने सवाल उठाया है कि नियमित रूप से काम लिए जाने के बावजूद समय पर भुगतान की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
संघ के अनुसार, जेएपी-आईटी की सूची में शामिल एजेंसियों के साथ पिछला अनुबंध जुलाई 2026 में समाप्त हो गया था। इसके बाद अनुबंध बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। संगठन ने यह भी कहा है कि झारखंड मैनपावर प्रोक्योरमेंट मैनुअल, 2025 के तहत नई संविदा को अंतिम रूप दिए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कर्मचारी संघ ने सरकार से जेएपी-आईटी और संबंधित एजेंसियों के बीच अनुबंध विस्तार अथवा नई संविदा की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कराने का आग्रह किया है। उसकी मांग है कि एजेंसी बदलने या अनुबंध समाप्त होने की स्थिति में भी कर्मचारियों का वेतन बाधित न हो, इसके लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
संगठन ने भुगतान में हुई देरी की समीक्षा करने और जवाबदेही तय करने की मांग भी रखी है। संघ का कहना है कि कर्मचारी कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि किए गए काम का पारिश्रमिक मांग रहे हैं। फिलहाल सरकार की ओर से भुगतान की तारीख या संविदा प्रक्रिया पूरी होने के संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।