रांची में झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने राज्य सरकार की प्रस्तावित सचिवालय सेवा नियमावली के पदोन्नति संबंधी प्रावधानों पर विरोध जताया है। संघ का कहना है कि विभिन्न पदों पर प्रोन्नति के लिए न्यूनतम सेवा अवधि बढ़ाए जाने से सचिवालय संवर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रगति धीमी हो सकती है। उसने नियमावली लागू करने से पहले इसकी समीक्षा करने की मांग रखी है।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार सहायक प्रशाखा पदाधिकारी से प्रशाखा पदाधिकारी बनने के लिए आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि दो वर्ष से बढ़ाकर आठ वर्ष करने का प्रावधान है। संघ की मुख्य आपत्ति इसी बदलाव को लेकर है। उसका तर्क है कि लंबी प्रतीक्षा अवधि का असर कर्मचारियों के करियर और उनके मनोबल पर पड़ेगा।
नियमावली में प्रशाखा पदाधिकारी से अवर सचिव पद पर पदोन्नति के लिए भी न्यूनतम अवधि छह वर्ष के बजाय आठ वर्ष प्रस्तावित की गई है। इसके अतिरिक्त अवर सचिव से उप सचिव बनने के लिए कम से कम पांच वर्ष की सेवा अनिवार्य करने की बात है। संघ ने इन प्रावधानों को सचिवालय सेवा के अधिकारियों के लिए प्रतिकूल बताया है।
उप सचिव से संयुक्त सचिव पद तक पहुंचने के लिए भी पांच वर्ष की अतिरिक्त सेवा अवधि का प्रस्ताव है। संघ के अनुसार, अलग-अलग स्तरों पर बढ़ी हुई समय-सीमा का संयुक्त प्रभाव यह हो सकता है कि सचिवालय सेवा के कई अधिकारी अपने सेवाकाल में संयुक्त सचिव स्तर तक न पहुंच पाएं। यह संघ का आकलन है और प्रस्तावित नियमों पर सरकार का अंतिम निर्णय अभी सामने नहीं आया है।
संघ ने अन्य समकक्ष सरकारी सेवाओं में लागू पदोन्नति अवधि का उल्लेख करते हुए सचिवालय सेवा के साथ समान व्यवहार की मांग की है। उसका कहना है कि यदि दूसरी सेवाओं में अपेक्षाकृत कम अवधि में पदोन्नति मिलती है, तो सचिवालय संवर्ग के लिए लंबी अवधि तय करना असमानता पैदा कर सकता है।
झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने सरकार से नियमावली के पदोन्नति प्रावधानों पर पुनर्विचार करने और आवश्यक संशोधन करने का आग्रह किया है। उपलब्ध जानकारी में सरकार की ओर से संघ की आपत्तियों पर किसी निर्णय या प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है। ऐसे में मामला फिलहाल प्रस्तावित नियमावली और उस पर कर्मचारी संघ के विरोध तक सीमित है।