झारखंड में कर चोरी की पहचान के लिए बनेगा IRIS, छह महीने में प्रणाली तैयार करने का लक्ष्य

राजस्व से जुड़े विभागों के पोर्टल और डेटाबेस को जोड़ने के लिए झारखंड सरकार IRIS विकसित करेगी। समझौते के बाद प्रणाली छह महीने में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

2 मिनट पढ़ें 7 बार पढ़ी गई
रांची के प्रोजेक्ट भवन में IRIS प्रणाली के एकरारनामे का कार्यक्रम

रांची में झारखंड सरकार ने राजस्व संग्रह को मजबूत करने और कर चोरी से जुड़े संदिग्ध मामलों की पहचान के लिए इंटीग्रेटेड रेवेन्यू इंटेलिजेंस सिस्टम (IRIS) विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की है। यह प्रणाली वाणिज्य-कर विभाग की CT-MIS परियोजना के अंतर्गत तैयार होगी। इसके लिए गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन में वित्त एवं वाणिज्य-कर मंत्री राधाकृष्ण किशोर की मौजूदगी में विभाग और चॉइस कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच एकरारनामा हुआ।

वाणिज्य-कर आयुक्त-सह-सचिव अमित कुमार के अनुसार, नई प्रणाली को छह महीने के भीतर विकसित करने का लक्ष्य है। इसके बाद अगले तीन वर्षों तक इसके क्रियान्वयन का काम किया जाएगा। अलग-अलग विभागों से मिलने वाले आंकड़ों का संयुक्त विश्लेषण कर राजस्व संग्रह में संभावित गड़बड़ी, कर अपवंचन और राजस्व ह्रास से जुड़े मामलों को चिह्नित करने की योजना है।

IRIS में बिजनेस इंटेलिजेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित उपकरणों के इस्तेमाल का प्रावधान है। इनकी सहायता से संदिग्ध लेनदेन की निगरानी की जा सकेगी। प्रणाली से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर संबंधित विभाग अपने नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकेंगे।

योजना के तहत जीएसटी नेटवर्क को खान एवं भूतत्व विभाग के JIMMS पोर्टल से जोड़ा जाएगा। परिवहन विभाग के VAHAN, आईटी विभाग के WAMIS, भूमि पंजीकरण, नगर विकास विभाग के प्रॉपर्टी टैक्स और श्रम विभाग के लेबर सेस पोर्टल को भी एकीकृत करने की तैयारी है। VAT पोर्टल को VAHAN और उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के राजस्व पोर्टल से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है।

इसके अतिरिक्त JPT पोर्टल को नगर विकास विभाग के ट्रेड लाइसेंस पोर्टल तथा JED पोर्टल को बिजली बिल पोर्टल से जोड़ने की योजना है। इस एकीकृत ढांचे का उद्देश्य विभिन्न सरकारी डेटाबेस में उपलब्ध सूचनाओं को एक जगह विश्लेषण योग्य बनाना है, ताकि राजस्व से जुड़े जोखिमों की पहचान अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सके।

कार्यक्रम में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने दावा किया कि केंद्र की आर्थिक नीतियों और विभिन्न प्रावधानों के कारण झारखंड को लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हो रही है। उन्होंने इसमें MMDR अधिनियम, जीएसटी सुधार और अनुदान में कमी का उल्लेख किया। मंत्री के अनुसार, ऐसी स्थिति में राज्य के अपने संसाधनों से राजस्व बढ़ाने की आवश्यकता है और नई तकनीकी प्रणाली इस दिशा में उपयोगी हो सकती है।