बहरागोड़ा के करीब 400 किसानों की जमा राशि पर हाईकोर्ट सख्त, निगम को 25 लाख रुपये जमा करने का निर्देश

बहरागोड़ा लैंप्स में किसानों की जमा पूंजी वापस नहीं मिलने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम से बकाये और भुगतान में देरी पर विस्तृत जवाब मांगा है।

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बहरागोड़ा लैंप्स के किसानों की जमा राशि से जुड़े मामले पर झारखंड हाईकोर्ट का निर्देश

बहरागोड़ा लैंप्स में करीब 400 किसानों की जमा पूंजी वापस नहीं मिलने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अंतरिम निर्देश जारी किया है। अदालत ने झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम लिमिटेड को छह नवंबर तक 25 लाख रुपये हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने को कहा है। यह रकम रजिस्ट्रार जनरल के नाम से जमा होगी और अदालत की अनुमति के बिना किसी पक्ष को नहीं दी जाएगी।

चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने निगम से उसके बकाये की स्थिति तथा बहरागोड़ा लैंप्स को कमीशन का भुगतान नहीं किए जाने के कारणों पर विस्तृत शपथपत्र मांगा है। आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी निगम के प्रबंध निदेशक को दी गई है। सहकारिता निबंधक से भी वित्तीय स्थिति की रिपोर्ट तलब की गई है।

किसानों की राशि वापस दिलाने की मांग को लेकर दिनेश महतो ने जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, लगभग 400 किसानों ने लैंप्स में कुल 24,64,497 रुपये जमा किए थे। अदालत को बताया गया कि पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए संस्था अभी यह रकम लौटाने में असमर्थता जता रही है।

सुनवाई में यह भी बताया गया कि लैंप्स के अध्यक्ष और सदस्य सचिव ने किसानों की जमा राशि होने से इनकार नहीं किया है। उनके शपथपत्र के मुताबिक, खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम से कमीशन और अन्य मदों में 1,09,21,705 रुपये मिलने बाकी हैं। लैंप्स का पक्ष है कि यह भुगतान प्राप्त होने के बाद किसानों की पूंजी लौटाई जा सकेगी।

हालांकि बकाये को लेकर प्रस्तुत आंकड़े एक समान नहीं हैं। राज्य सरकार के शपथपत्र में निगम पर लैंप्स का 1,28,18,108.16 रुपये बकाया बताया गया है, जबकि लैंप्स ने 1,09,21,705 रुपये का दावा रखा है। इसी अंतर के कारण अदालत ने निगम से वास्तविक देनदारी और भुगतान नहीं होने की वजह स्पष्ट करने वाला विस्तृत जवाब मांगा है।

फिलहाल 25 लाख रुपये जमा कराने का निर्देश अंतरिम व्यवस्था है। रजिस्ट्री में पैसा जमा हो जाने के बाद भी उसका वितरण अदालत की अनुमति पर निर्भर करेगा। किसानों को उनकी राशि कब और किस प्रक्रिया से वापस मिलेगी, इस पर आगे की सुनवाई तथा मांगी गई वित्तीय रिपोर्टों के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।