झारखंड में कृषि यंत्र वितरण के लिए प्रखंड स्तर पर लगेंगे कैंप, जिलों को प्रक्रिया तेज करने का निर्देश

भूमि संरक्षण निदेशालय ने जिलों से कैंप की तिथि और स्थान तय कर लाभुकों को पहले सूचना देने तथा पुराने विपत्रों का भुगतान शीघ्र कराने को कहा है।

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झारखंड में कृषि यंत्र वितरण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश से संबंधित प्रतीकात्मक दृश्य

रांची में भूमि संरक्षण निदेशालय ने झारखंड के सभी जिलों को किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और अन्य लाभुकों के बीच कृषि यंत्रों का वितरण तेज करने का निर्देश दिया है। इसके लिए प्रखंड स्तर पर कैंप आयोजित किए जाएंगे, जहां विभिन्न स्वीकृत योजनाओं के तहत ट्रैक्टर और दूसरे कृषि उपकरण उपलब्ध कराए जाने हैं।

निर्देश के अनुसार, प्रत्येक जिले को वितरण कैंप की तिथि और स्थान पहले तय करना होगा। इसकी जानकारी संबंधित एजेंसियों, लाभुक समूहों और किसानों तक समय रहते पहुंचाने को कहा गया है, ताकि चयनित लोगों की मौजूदगी सुनिश्चित हो और वितरण की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से पूरी की जा सके।

भूमि संरक्षण निदेशक ने जिलों के सहायक निदेशक (सर्वे), भूमि संरक्षण पदाधिकारियों और भूमि संरक्षण (सर्वे) पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में भी कृषि यंत्रों का वितरण प्रखंड स्तर पर कैंप लगाकर करने का निर्देश दिया गया था।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में पावर टिलर, मिनी ट्रैक्टर, रीपर और राइस ट्रांसप्लांटर सहित अन्य कृषि यंत्रों के वितरण के लिए 40 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली योजना स्वीकृत की गई थी। इन उपकरणों का उद्देश्य पात्र किसानों और समूहों तक खेती से जुड़ी मशीनें पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री ट्रैक्टर वितरण योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में ट्रैक्टर तथा सहायक कृषि यंत्रों के लिए 150 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को स्वीकृति मिली थी। इसके अतिरिक्त वित्तीय वर्ष 2025-26 में मिनी ट्रैक्टर, पावर टिलर, रीपर, राइस ट्रांसप्लांटर और अन्य उपकरणों के लिए 13 करोड़ रुपये की एक अलग योजना स्वीकृत की गई है।

निदेशालय ने पहले वितरित किए जा चुके ट्रैक्टरों और कृषि यंत्रों से संबंधित विपत्रों का भुगतान भी शीघ्र कराने का निर्देश दिया है। इससे लंबित भुगतान निपटाने के साथ आगामी कैंपों में वितरण की गति बढ़ाने पर जोर दिया गया है। अब जिलों को स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम निर्धारित कर एजेंसियों और लाभुकों के बीच समन्वय बनाना होगा।