झारखंड में 22 अक्टूबर से ‘खेत बचाओ अभियान’, सभी जिलों में किसानों को किया जाएगा जागरूक

कृषि निदेशालय ने अभियान की तैयारियों की ऑनलाइन समीक्षा की। इसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों का उपयोग घटाने, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बचाने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है।

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रांची में खेत बचाओ अभियान की तैयारियों की ऑनलाइन समीक्षा करते कृषि अधिकारी

रांची स्थित कृषि निदेशालय ने झारखंड के सभी जिलों में 22 अक्टूबर से शुरू होने वाले ‘खेत बचाओ अभियान’ की तैयारियों की समीक्षा की। कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा ‘पंकज’ ने जिला कृषि पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक कर अभियान के संचालन से जुड़े निर्देश दिए। केंद्र की योजना के तहत यह अभियान 30 नवंबर तक चलाया जाना है।

कृषि निदेशक के अनुसार, जिलास्तर पर अभियान की औपचारिक शुरुआत 22 अक्टूबर से होगी। राज्य और जिला स्तर पर 22 से 28 अक्टूबर के बीच बड़े कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है। रांची में होने वाले कार्यक्रम में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और कृषि सचिव अबू बकर सिद्दीक के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

अभियान का प्रमुख उद्देश्य खेती में रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल यथासंभव कम करना और मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना है। इसके साथ प्राकृतिक तथा जैविक खेती को प्रोत्साहित करने और किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

बैठक में झारखंड की अम्लीय मिट्टी को देखते हुए अभियान की उपयोगिता पर चर्चा हुई। कृषि निदेशक ने बताया कि राज्य में खेती योग्य भूमि का बड़ा हिस्सा अम्लीय है और यहां औसत अन्न उत्पादन राष्ट्रीय औसत से कम है। अभियान के दौरान किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता तथा उर्वरता सुरक्षित रखने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के मृदा विभाग के डॉ. पीबी साहा के अनुसार, झारखंड में करीब 10 लाख हेक्टेयर भूमि की मिट्टी अम्लीय है। उन्होंने बताया कि ऐसी भूमि में प्रति हेक्टेयर तीन से चार क्विंटल चूना या डोलोमाइट इस्तेमाल कर सुधार किया जा सकता है। अभियान में किसानों तक इससे जुड़ी उपयोगी जानकारी पहुंचाने की योजना है।

कृषि विभाग ने इसे समेकित अभियान के रूप में चलाने की बात कही है। इसमें प्रगतिशील किसानों, कृषक मित्रों, समितियों, पंचायती राज प्रतिनिधियों, किसान उत्पादक संगठनों, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक पदाधिकारियों का सहयोग लिया जाएगा। जिलों को स्थानीय स्तर पर समन्वय बनाकर किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है।