पश्चिमी सिंहभूम जिले के घाटकुड़ी रक्षित वन क्षेत्र में स्थित विजया-टू लौह अयस्क खदान को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। टाटा स्टील की यह खदान पिछले 15 महीने से बंद है। कंपनी अब इसके संचालन के लिए माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर यानी एमडीओ व्यवस्था अपनाने की तैयारी कर रही है।
खदान के लिए आमंत्रित निविदा में देश की चार से पांच कंपनियों ने रुचि दिखाते हुए आवेदन किया है। एमडीओ के चयन के बाद खनन कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में चयन या खदान के दोबारा खुलने की निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।
नई व्यवस्था में खनन से जुड़े कई काम एक ही एजेंसी को सौंपे जाएंगे। इनमें खनन, परिवहन, क्रशिंग, स्क्रीनिंग, पानी का छिड़काव, सड़क रखरखाव, फीडिंग और रेलवे रैक में माल चढ़ाने जैसे कार्य शामिल हैं। पहले इन गतिविधियों के लिए करीब डेढ़ दर्जन अलग-अलग कंपनियां तैनात थीं।
खदान फिर शुरू करने की दिशा में जिला प्रशासन और टाटा स्टील के बीच 31 अगस्त 2026 को औपचारिक समझौता हुआ था। समझौते पर उपायुक्त मनीष कुमार तथा कंपनी की ओर से महाप्रबंधक देवाशीष जेना, माइनिंग प्लान एवं प्रोजेक्ट चीफ अवनीष कुमार और विजया-टू माइंस के चीफ सह माइंस एजेंट राजीव कुमार ने हस्ताक्षर किए थे।
विजया-टू खदान 383.20 एकड़, यानी 155.078 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है। इसका मूल खनन पट्टा अगस्त 2005 से अगस्त 2025 तक उषा मार्टिन को स्वीकृत था। बाद में सरकारी अनुमति से पट्टा टाटा स्पंज आयरन लिमिटेड को हस्तांतरित हुआ। कंपनी का नाम आगे चलकर टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स हुआ और अंततः उसका टाटा स्टील में विलय हो गया।
राज्य मंत्रिपरिषद ने 28 दिसंबर 2016 को संबंधित पट्टे को 50 वर्षों के लिए विस्तारित करने के अनुरोध को मंजूरी दी थी। खदान चालू होने पर जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने तथा परिवहन और लोडिंग जैसे सहायक कारोबारों को गति मिलने की संभावना जताई गई है।