झारखंड में पारस्परिक स्थानांतरण से आए कर्मियों की वरीयता पर संशोधित नियम जारी

कार्मिक विभाग ने स्पष्ट किया है कि वरीयता से जुड़ी शर्तें उन्हीं कर्मियों पर लागू होंगी, जिनके पारस्परिक स्थानांतरण आदेश में इसका उल्लेख होगा।

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रांची में झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग से संबंधित सांकेतिक दृश्य

रांची में झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर राज्य में आए कर्मियों की वरीयता तय करने से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। यह व्यवस्था बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद स्थानांतरित कर्मचारियों से संबंधित है।

विभाग की ओर से जारी संशोधन में बताया गया है कि वरीयता से जुड़ी मौजूदा शर्तें प्रत्येक स्थानांतरित कर्मचारी पर स्वतः लागू नहीं होंगी। उनका प्रभाव केवल उन कर्मियों पर पड़ेगा, जिनके पारस्परिक स्थानांतरण आदेश में वरीयता के दावे को मान्य नहीं किए जाने या झारखंड कार्मिक विभाग के पत्र के अनुसार वरीयता निर्धारित किए जाने का स्पष्ट उल्लेख है।

इसके लिए विभागीय परिपत्र संख्या 6160 की कंडिका सात में नई उप-कंडिका 7(iii) जोड़ने का निर्णय लिया गया है। सरकार के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के हस्ताक्षर से जारी पत्र में संशोधित व्यवस्था की जानकारी दी गई है।

इससे पहले संबंधित परिपत्र में पुराने विभागीय निर्णयों को संकलित किया गया था। पूर्व व्यवस्था के अनुसार अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद पारस्परिक स्थानांतरण पर झारखंड आने वाले कर्मियों को मूल वरीयता का लाभ नहीं मिलता था और उन्हें अपनी कोटि में अपने बैच के कर्मियों की तुलना में सबसे कनीय माना जाता था।

नए संशोधन का केंद्र स्थानांतरण आदेश में दर्ज शर्तों को बनाया गया है। इससे किसी कर्मचारी की वरीयता निर्धारित करते समय यह देखना आवश्यक होगा कि उसके आदेश में वरीयता के दावे से संबंधित प्रावधान स्पष्ट रूप से लिखा गया है या नहीं। विभाग ने इस तरह नियम लागू होने की सीमा को स्पष्ट किया है।

आदेश की प्रतिलिपि पीएमयू कोषांग के नोडल पदाधिकारी को वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए भेजी गई है। इसकी प्रति विभागीय वरीय प्रभारी प्रशाखा पदाधिकारी को भी प्रेषित की गई है। संशोधित नियम पारस्परिक स्थानांतरण से आए कर्मियों की सेवा-वरीयता से जुड़े मामलों के निर्धारण का आधार बनेगा।