रोजगार संकेतकों में झारखंड के जिलों के बीच बड़ा अंतर, धनबाद का अनुपात 46.7 प्रतिशत

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की हालिया रिपोर्ट के उपलब्ध आंकड़ों में पश्चिमी सिंहभूम का रोजगार अनुपात सबसे अधिक और धनबाद का सबसे कम बताया गया है। युवा बेरोजगारी और रोजगार-शिक्षा से बाहर रहने की स्थिति में भी जिलों के बीच अंतर सामने आया है।

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झारखंड के जिलों में रोजगार की स्थिति दर्शाती सांकेतिक तस्वीर

धनबाद समेत झारखंड के 10 जिलों में रोजगार से जुड़े संकेतकों में बड़ा अंतर सामने आया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की हालिया रिपोर्ट के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम में 67.1 प्रतिशत आबादी के पास रोजगार है, जबकि धनबाद में यह अनुपात 46.7 प्रतिशत बताया गया है।

पश्चिमी सिंहभूम में काम करने या काम की तलाश में शामिल लोगों की हिस्सेदारी भी सबसे अधिक 68.3 प्रतिशत दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि अध्ययन में शामिल जिलों की कामकाजी आबादी की स्थिति एक जैसी नहीं है और धनबाद तथा पश्चिमी सिंहभूम के बीच उल्लेखनीय अंतर है।

रिपोर्ट में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के उन युवाओं का भी आकलन किया गया है, जो रोजगार, पढ़ाई या प्रशिक्षण में शामिल नहीं हैं। इस श्रेणी में देवघर की हिस्सेदारी 32.4 प्रतिशत है। धनबाद में यह आंकड़ा 32 प्रतिशत, बोकारो में 30 प्रतिशत और पूर्वी सिंहभूम में 28.3 प्रतिशत बताया गया है।

इसके मुकाबले पश्चिमी सिंहभूम में रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण से बाहर युवाओं का अनुपात 10.4 प्रतिशत है। गढ़वा में यह 14.9 प्रतिशत और रांची में 16.5 प्रतिशत दर्ज किया गया है। उपलब्ध आंकड़े युवाओं की भागीदारी में भी जिलावार अंतर दिखाते हैं।

बेरोजगारी दर के आंकड़ों में बोकारो 8.6 प्रतिशत के साथ अध्ययन में शामिल जिलों में सबसे ऊपर है। धनबाद की बेरोजगारी दर 8 प्रतिशत बताई गई है। दूसरी ओर पलामू में यह दर 1.1 प्रतिशत है, जो इन 10 जिलों में सबसे कम है, जबकि रांची में बेरोजगारी दर 2.7 प्रतिशत दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के अलग-अलग संकेतक रोजगार प्राप्त आबादी, काम करने या काम तलाशने वालों और रोजगार-शिक्षा-प्रशिक्षण से बाहर युवाओं की स्थिति को सामने रखते हैं। इसलिए धनबाद की स्थिति को समझने के लिए केवल एक आंकड़े के बजाय रोजगार अनुपात, बेरोजगारी दर और युवाओं की भागीदारी—तीनों को साथ देखकर जिलों से तुलना करना जरूरी है।