झारखंड में प्रति लाख युवाओं पर केवल 9 कॉलेज, उच्च शिक्षा में छात्राओं का जीईआर 20.2 प्रतिशत

उच्च शिक्षा सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार झारखंड में कॉलेजों की संख्या पांच वर्षों में बढ़ी है, लेकिन उपलब्धता अब भी राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।

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झारखंड में कॉलेजों की उपलब्धता और उच्च शिक्षा नामांकन से संबंधित प्रतीकात्मक दृश्य

रांची से सामने आए उच्च शिक्षा के नए आंकड़े झारखंड में संस्थागत विस्तार की जरूरत दिखाते हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन 2023-24 के अनुसार, राज्य में 23 वर्ष आयु वर्ग के प्रति एक लाख युवाओं पर केवल नौ कॉलेज उपलब्ध हैं। अखिल भारतीय स्तर पर यही संख्या 32 कॉलेज है।

सर्वेक्षण के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में झारखंड में कॉलेजों की कुल संख्या 323 से बढ़कर 436 हो गई है। इसके बावजूद आबादी के अनुपात में कॉलेजों की उपलब्धता में बड़ा बदलाव नहीं आया है। इस अवधि में राज्य का कॉलेज घनत्व प्रति एक लाख आबादी पर आठ या नौ संस्थानों के आसपास ही रहा।

सीमित संख्या में कॉलेज होने का असर प्रत्येक संस्थान पर विद्यार्थियों के दबाव के रूप में भी दिखाई देता है। झारखंड के एक कॉलेज में औसतन 1,611 विद्यार्थी नामांकित हैं। प्रति कॉलेज औसत नामांकन के मामले में यह संख्या बिहार और दिल्ली के बाद सबसे अधिक बताई गई है।

शिक्षकों की उपलब्धता भी राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है। छात्र-शिक्षक अनुपात में पहले के मुकाबले कमी दर्ज हुई है, फिर भी झारखंड में औसतन 48 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक उपलब्ध है। रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुपात बिहार के बाद देश में सबसे अधिक है।

इन चुनौतियों के बीच छात्राओं की भागीदारी का आंकड़ा अपेक्षाकृत सकारात्मक है। राज्य में उच्च शिक्षा का कुल सकल नामांकन अनुपात यानी जीईआर 19.4 प्रतिशत है। छात्रों का जीईआर 18.7 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि छात्राओं का अनुपात उनसे अधिक 20.2 प्रतिशत रहा।

आंकड़े बताते हैं कि छात्राओं के नामांकन और कुल संस्थानों की संख्या में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन कॉलेजों की आबादी आधारित उपलब्धता तथा शिक्षकों की संख्या में बड़ा अंतर बना हुआ है। सर्वेक्षण से उभरती स्थिति नए उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित करने और शिक्षक पदों पर नियुक्ति बढ़ाने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।