झारखंड में योजना खर्च की धीमी रफ्तार पर चिंता, 60 दिन में टेंडर पूरा करने का निर्देश

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने निर्माण विभागों में टेंडर की देरी पर चिंता जताई है। 22 अक्टूबर तक पुनरीक्षित योजना बजट का 29.38 प्रतिशत खर्च हुआ था।

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झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की फाइल तस्वीर

रांची में राज्य की विकास योजनाओं और बजट खर्च की धीमी रफ्तार को लेकर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विकास आयुक्त को पत्र लिखा है। उन्होंने निर्माण कार्यों से जुड़े विभागों में टेंडर प्रक्रिया हर हाल में 60 दिनों के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है, ताकि स्वीकृत योजनाओं का क्रियान्वयन समय पर आगे बढ़ सके।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पुनरीक्षित योजना बजट 1,06,200.94 करोड़ रुपये निर्धारित है। इसमें से 22 अक्टूबर तक 31,196.72 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। यह कुल बजट का 29.38 प्रतिशत है। वित्त मंत्री ने खर्च की इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कम राशि खर्च करने वाले विभागों के सचिवों के साथ विशेष समीक्षा बैठक करने को कहा है।

पत्र में निर्माण विभागों की टेंडर प्रक्रिया में लग रहे लंबे समय को प्रमुख समस्या बताया गया है। कई मामलों में इसे पूरा करने में छह महीने से डेढ़ वर्ष तक लगने की बात सामने आई है। इससे परियोजनाओं की शुरुआत और आवंटित राशि के उपयोग, दोनों में देरी हो रही है। संबंधित विभागों को लंबित टेंडरों का शीघ्र निपटारा करने को कहा गया है।

वित्त मंत्री ने शेष वित्तीय अवधि में बजट राशि के उपयोग में तेजी लाने का निर्देश भी दिया है। दिसंबर 2026 तक 75 हजार करोड़ रुपये खर्च करने के लक्ष्य के मुकाबले 22 अक्टूबर तक हुए व्यय के बाद करीब 43,803 करोड़ रुपये और खर्च करने होंगे। इसके लिए विभागों को योजनाओं की प्रगति और राशि के उपयोग की नियमित निगरानी करनी होगी।

देरी का असर रांची की कुछ बड़ी परियोजनाओं पर भी बताया गया है। नगर विकास विभाग के तहत जुडको को ट्रांसपोर्ट नगर के दूसरे चरण का निर्माण कराना है। प्रशासनिक और कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद इसका काम अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका है। जुडको के माध्यम से संचालित जलापूर्ति योजनाओं की प्रगति भी प्रभावित होने की जानकारी दी गई है।

इसी तरह पथ निर्माण विभाग के अंतर्गत राजधानी में लगभग 1,401 करोड़ रुपये की लागत वाली 10 बड़ी सड़क योजनाएं प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं के आगे नहीं बढ़ पाने को प्रशासनिक और वित्तीय सुस्ती से जोड़ा गया है। नए निर्देशों के बाद विभागों के सामने टेंडर समय पर पूरा करने, लंबित काम आगे बढ़ाने और निर्धारित बजट का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी।