रांची में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने आगामी धान खरीद की तैयारी के तहत पंजीकृत किसानों के लिए ई-केवाईसी और भूमि सत्यापन अनिवार्य कर दिया है। सरकारी दर पर धान बेचने के इच्छुक किसानों को 15 नवंबर तक अंचल कार्यालय से जमीन का सत्यापन कराने के बाद जिला आपूर्ति पदाधिकारी कार्यालय में नए सिरे से पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
विभाग का कहना है कि बीते खरीफ विपणन वर्ष में पंजीकृत किसानों की पहचान का इस्तेमाल कर बिचौलियों द्वारा धान बेचने की शिकायतें मिली थीं। नई व्यवस्था का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और वास्तविक किसानों से ही धान लेना है। सत्यापन के जरिए किसान के पास मौजूद जमीन का मौजूदा विवरण भी दर्ज किया जाएगा, क्योंकि धान बेचने की पात्रता उससे जुड़ी है।
खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के अनुसार, सफल ई-केवाईसी और अंचल कार्यालय से भूमि सत्यापन कराने वाले किसानों से ही धान खरीदा जाएगा। विभाग इस प्रक्रिया में जीपीएस प्रणाली का भी उपयोग कर रहा है। अब तक 1,59,226 किसानों को प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए 2,84,740 मोबाइल संदेश भेजे गए हैं।
राज्य में विभाग के रिकॉर्ड पर कुल 2,93,838 पंजीकृत किसान हैं। इनमें पिछले खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान 78,058 किसानों ने सरकार को धान बेचा था। उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, हजारीबाग में सर्वाधिक 40,172 और लोहरदगा में सबसे कम 4,785 पंजीकृत किसान हैं।
किसानों के सामने समय पर सत्यापन पूरा कराने की चुनौती भी सामने आ रही है। नामकुम प्रखंड के कोईबेरा गांव के किसान रौशन हंस ने बताया कि विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यस्तता के कारण भूमि सत्यापन आगे नहीं बढ़ पा रहा है। किसान ललिता देवी ने भी दोबारा सत्यापन और ई-केवाईसी के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने से खेती का काम प्रभावित होने की चिंता जताई है।
झारखंड में करीब 850 धान अधिप्राप्ति केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों के माध्यम से एक किसान सामान्य रूप से अधिकतम 200 क्विंटल धान बेच सकता है, हालांकि विशेष परिस्थिति में वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति से यह सीमा बढ़ाई जा सकती है। नई शर्तों के कारण सरकारी खरीद में भाग लेने वाले किसानों के लिए तय समय के भीतर दोनों प्रक्रियाएं पूरी करना जरूरी होगा।