झारखंड में स्कूल से बाहर रह गए बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए डहर पोर्टल पर बसावट मैपिंग और घरेलू सर्वेक्षण किया जा रहा है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की यह पहल 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के उन बच्चों पर केंद्रित है, जिन्होंने कभी विद्यालय में दाखिला नहीं लिया या पढ़ाई बीच में छोड़ दी है।
कार्ययोजना के तहत बसावटों को संबंधित स्कूलों से जोड़ा जाएगा। सर्वेक्षण के लिए शिक्षकों की जिम्मेदारी तय करने, परिवार आवंटित करने और ऐसे कार्यस्थलों की पहचान करने की प्रक्रिया भी शामिल है, जहां स्कूल से बाहर बच्चे मिल सकते हैं। इसका उद्देश्य पहचान और नामांकन की निगरानी को व्यवस्थित बनाना है।
सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक घर-घर सर्वेक्षण कर पारिवारिक और शैक्षणिक जानकारी जुटाएंगे। प्रखंड और संकुल स्तर के संसाधन कर्मियों को कार्यस्थलों का सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी दी गई है। उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर स्कूल से बाहर बताए गए बच्चों की स्थिति की पुष्टि भी की जाएगी।
सर्वेक्षण से एकत्र आंकड़ों का इस्तेमाल समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना और बजट 2026-27 तैयार करने में किया जाएगा। इससे संबंधित क्षेत्रों में स्कूल से बाहर बच्चों की संख्या समझने और उन्हें शिक्षा से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम निर्धारित करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
परियोजना का प्रमुख लक्ष्य ‘जीरो ड्रॉपआउट हैबिटेशन’ तैयार करना है। इसके लिए किसी बसावट के 6 से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों का स्कूल में नामांकन, आवंटित परिवारों का पूरा सर्वेक्षण और निर्धारित घोषणा-पत्र की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक होगा।
इस अभियान में स्कूल प्रशासन, जिला अधिकारियों और अधिकृत साझेदारों के बीच समन्वय पर जोर दिया गया है। सर्वेक्षण और सत्यापन पूरा होने के बाद मिली जानकारी के आधार पर बच्चों को विद्यालय से जोड़ने तथा उनके नामांकन की निगरानी मजबूत करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।