झारखंड में स्वाइन फ्लू के 36 मामले, अस्पतालों को आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने का निर्देश

राज्य में एच1एन1 संक्रमण के 36 मामलों की पुष्टि हुई है। इनमें 18 बच्चे और किशोर हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों तथा जांच केंद्रों को सतर्कता और सूचना साझा करने के निर्देश दिए हैं।

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रांची में स्वाइन फ्लू की जांच और अस्पतालों की तैयारी से संबंधित प्रतीकात्मक दृश्य

झारखंड में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 के 36 मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार संक्रमितों में 18 छोटे बच्चे या किशोर हैं। विभाग ने सरकारी और निजी अस्पतालों से स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने को कहा है। कई मरीजों के स्वस्थ होकर घर लौटने की भी जानकारी दी गई है।

संक्रमण की पुष्टि रांची के रिम्स, जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज और रांची की एक निजी पैथोलॉजी में हुई जांचों के आधार पर की गई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के पास अभी रिम्स के आठ और एमजीएम के तीन संक्रमितों का ही विवरण पहुंचा है। विभाग का कहना है कि निजी प्रयोगशालाओं और अस्पतालों से पूरी जानकारी नहीं मिलने के कारण राज्य का समेकित आंकड़ा तैयार करने में कठिनाई हो रही है।

स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों को संक्रमित मरीजों का पूरा विवरण एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जिलों से भी कहा गया है कि अस्पताल में संदिग्ध मरीज मिलने पर नमूने की तुरंत जांच कराई जाए। जरूरत पड़ने पर नमूना निकटतम अधिकृत केंद्र रिम्स या एमजीएम भेजा जा सकता है।

रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में 31 अगस्त तक 30 संदिग्ध नमूनों की जांच हुई थी। इनमें आठ नमूने पॉजिटिव पाए गए। इन आठ संक्रमितों में छह की आयु आठ से 14 वर्ष के बीच बताई गई है। विभाग के एक चिकित्सक के अनुसार नवजात, छोटे बच्चे और किशोर अपेक्षाकृत कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण वायरस की चपेट में जल्दी आ सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान से लौटे कुछ लोगों में भी संक्रमण की पुष्टि हुई। ऐसे लोगों को शुरुआत में सामान्य फ्लू जैसे लक्षण थे और जांच के बाद एच1एन1 का पता चला। रिम्स के एक चिकित्सक भी दिल्ली से लौटने के बाद संक्रमित पाए गए थे।

रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार के अनुसार स्वाइन फ्लू में तेज बुखार के साथ सर्दी और खांसी जैसे लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने अनावश्यक घबराहट से बचने और सावधानी बरतने की बात कही है। मौजूदा स्थिति में विभाग का जोर संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच, अस्पतालों की तैयारी और सभी जांच केंद्रों से नियमित सूचना प्राप्त करने पर है।